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5 लाख करोड़ की उधारी! बजट के बाद बड़ा सवाल क्या फिर कर्ज लेगी सरकार?

MP Budget 2026: पिछले पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की बीजेपी सरकार पर रिकॉर्ड स्तर पर कर्ज का बोझ बढ़ा है...मोहन सरकार कम आय और ज्यादा खर्च के बीच की है संतुलन साधने की कोशिश, फिर भी बड़ा सवाल... क्या फिर कर्ज लेगी सरकार?

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MP budget 2026 government debt

MP budget 2026 government debt(photo: X)

MP Budget 2026: मध्य प्रदेश विधानसभा में आज मोहन सरकार के कार्यकाल का तीसरा बजट 2026-27 पेश हो गया है। बजट पेश होने के बाद प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। पिछले पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की बीजेपी सरकार पर रिकॉर्ड स्तर पर कर्ज का बोझ बढ़ा है और सरकार लगातार कर्ज ले रही है। लेकिन बजट में मोहन सरकार ने विकास के दावों के बीच इसे संतुलित करने की कोशिश की है। इस कोशिश के पीछे एक बड़ा सवाल छूट रहा है, खर्च आय से ज्यादा होगा तो क्या सरकार फिर लेगी कर्ज...?

एमपी पर कर्ज की रफ्तार का सच

मध्य प्रदेश सरकार पर कर्ज की रफ्तार कितनी तेज है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश की कर्जदारी 5 साल में तेज रफ्तार से बढ़ी है।

  • 2022-23- 2.95 लाख करोड़ का कर्ज
  • 2023-24- 3.14 लाख करोड़ की उधारी
  • 2024-25- 3.65 लाख करोड़ का कर्ज
  • 2025-26- में 4.21 लाख करोड़ का लिया उधार
  • 2026 में अब तक 4.65 लाख करोड़ के कर्ज का अनुमान।
  • यानी अगले कुछ महीनों में प्रदेश पर कर्ज का ये बोझ 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।

सरकार ने ऐसे साधा संतुलन


इतने भारी कर्ज के बावजूद मध्य प्रदेश सरकार ने बजट में कुछ ऐसे कदम उठाएं हैं, जिससे वित्तीय संकट की स्थिति को टाला जा सकता है।

  • पूंजीगत व्यय पर जोरसरकार ने इसे सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3.5%-4% की सीमा के अंदर रखने का लक्ष्य रखा गया है।
  • राजस्व में बढ़ोत्तरीआबकारी, वैट और खनिज संपदा से होने वाली आय में वृद्धि के माध्यम से ब्याज की राशि भुगतान के बोझ को कम करने की कोशिश की गई है।

कर्ज बढ़ने के बावजूद इन योजनाओं को फंड

सरकार ने कर्ज के बावजूद प्रदेश की महत्वाकांक्षी योजनाओं को बंद नहीं किया है। बल्कि इनके लिए निवेश जारी किया है। इनमें लाडली बहना योजना के साथ ही कई जनकल्याणकारी योजनाओं के फंड का प्रावधान रखा गया है। युवाओं के लिए बजट में विकास कौशल और स्वरोजगार के लिए विशेष पैकेज दिए गए हैं।

कुल बजट 2026-27- 4,38,317 करोड़- यह वह राशि है जिसे सरकार 2026-27 में खर्च करेगी।

अनुमानित राजस्व प्राप्ति- 2026-27 3,08,703 करोड़- यह सरकार की कर्मी आय, टैक्स, अन्य राजस्व है, जो खर्च का हिस्सा पूरा करती है।

राजकोषीय घाटा 2026-27- 4,38,317-3,08,703 करोड़= 1,29, 614 करोड़

घाटे का प्रतिशत करीब 3.87% (GSDP) है।

इसका सीधा अर्थ है बजट 2026 में करीब 1,29,614 करोड़ रुपए का अंतर है, यानी जब आय 3.08 लाख करोड़ से कम और खर्च 4.38 करोड़ से ज्यादा है तो इस अंतर को भरने के लिए सरकार को एक बार फिर कर्ज लेने की स्थिति बनेगी।

बता दें कि बजट 2026 से पहले विपक्ष ने सदन के बाहर जमकर हंगामा किया। वे हाथों में कुछ सिक्के रखी हुई गुल्लक लेकर पहुंचे और कर्ज वाली सरकार के नारे लगाते हुए सरकार के खजाने को खाली बताया। कहना होगा कि विपक्ष भले ही सरकार को कर्ज वाली सरकार कह रहा है, लेकिन उधर सत्ता पक्ष का कहना है कि प्रदेश की GSDP तेजी से बढ़ रही है। इसलिए कर्ज लेने के लिए प्रदेश की क्षमता बढ़ी है। ऐसे में असली चुनौती अब यह होगी कि क्या सरकार करीब 5 लाख करोड़ के कर्ज का उपयोग केवल प्रशासनिक खर्चों में करेगी या फिर वाकई जमीन पर बुनियादी ढांचा तैयार कर कर्ज का बोझ कम करेगी?