
Kshamavani Parv Mahotsav : जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण क्षमावाणी पर्व के अवसर पर सीएम आवास पर क्षमावाणी महोत्सव (Kshamavani Parv Mahotsav) का आयोजन किया गया था। यहां सीएम मोहन यादव ने दो बड़ी घोषणाएं की। उन्होंने घोषणा की कि मध्य प्रदेश में जैन कल्याण बोर्ड बनाया जाएगा और सागर के मेडिकल कॉलेज का नाम बदलकर बड़े जैन मुनि आचार्य विद्यासागर के नाम पर रखा जाएगा।
जैन कल्याण बोर्ड के अंतर्गत जैन मुनि, आचार्य, साधुसंतों को मार्ग से गुजरने के दौरान आवश्यकता होने पर शासकीय भवन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि जैन धर्म और संस्कृति का गौरवशाली इतिहास रहा है। भारत और मध्य प्रदेश के अलावा उनके निर्वाचन क्षेत्र उज्जैन भी जैन धर्म को हजारों सालों से मानने वाली नगरी है। इस महोत्सव में सीएम मोहन यादव के साथ कैबिनेट मंत्री चैतन्य कश्यप, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा, पूर्व कैबिनेट मंत्री जयंत मलैया और अन्य विधायक भी मौजूद थे।
इस महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जैन समाज के प्रति समर्पण के लिए प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। सीएम ने इसके बाद महोत्सव को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत हज़ारों सालों से 'जियो और जीने दो' कि परंपरा पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया और न ही किसी को गुलाम बनाया। उन्होंने भगवान महावीर को याद करते हुए कहा कि समर्थ, सक्षम और बड़ा आदमी छोटे के प्रति क्षमा और विन्रमता का भाव रखे तो यह वीरता को दर्शाता है। यह भगवान महावीर का दर्शन है। जैन धर्म के आचार्यों ने हमें आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया है। सीएम मोहन यादव के बाद सांसद वीडी शर्मा ने भी महोत्सव में जैन धर्म के प्रति अपने विचारों को रखते हुए कहा कि क्षमा की भावना रखना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि क्षमा वही कर सकता है, जो क्षमतावान और शक्तिमान है।
क्षमावाणी या "क्षमा दिवस" जैन धर्म के अनुयायियों के लिए क्षमा करने और क्षमा मांगने का एक अनोखा पर्व है। इस पर्व को दिगंबर जैन जैन कैलेंडर के अश्विन कृष्ण महीने के पहले दिन मनाते हैं तो वहीँ श्वेतांबर इसे भाद्र के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन चतुर्थी के दिन मनाते है। इस पवित्र दिन पर, जैन समुदाय का प्रत्येक सदस्य, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, सभी के पास जाता है और अपने सभी दोषों या गलतियों के लिए क्षमा मांगता है, जो जानबूझकर या अनजाने में की गई हों। क्षमा मांगते समय "मिच्छामी दुक्कड़म" बोला जाता है जिसका अर्थ है जो भी बुरा किया गया है वह निष्फल हो। यह दिन केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि मोक्ष के मार्ग पर उनका पहला कदम है, जो जैन धर्म की शिक्षाओं के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन का अंतिम लक्ष्य है। भगवान महावीर के अनुसार, क्षमा अहिंसा का दूसरा नाम है जो सभी को 'जियो और जीने दो' का सही मार्ग दिखाती है।
Updated on:
22 Sept 2024 11:36 am
Published on:
22 Sept 2024 11:23 am
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