
Mental Health Alert: पति की मौत की खबर सुन पत्नी ने दी जान, परिवार ने कहा सच्चा प्रेम था, मनोचिकित्सक बोले मानसिक विडंबना। (फोटो सोर्स- Freepik AI Generated Image)
Mental Health Alert MP: मध्य प्रदेश के रीवा से हाल ही में पति की मौत की खबर सुनने के कुछ मिनट बाद ही पत्नी ने भी सुसाइड कर लिया। इस खबर को पढ़ने सुनने वाले लोग इसे 'सच्चे प्यार' की कहानियों में शामिल कर देते हैं। भारतीय समाज के विभिन्न संस्कृति स्वरूप में ऐसी अनगिनत कहानियां मिल जाती हैं, जो मरते दम तक एक दूजे की कसमें निभाते हुए एक साथ दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रेमी जोड़ों या विवाहित जोड़ों की हैं। ये कहानियां बड़े-छोटे पर्दों पर नजर भी नजर आ जाती हैं। लेकिन इनके पीछे का सच बहुत ही कड़वा है।
दरअसल मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि ऐसी घटनाओं को सच्चा प्यार कहकर मानसिक स्थिति को इग्नोर नहीं किया जाना चाहिए। वे कहते हैं ऐसे घटनाक्रमों को मनोविज्ञान में "acute grief reaction" या "bereavement-related crisis" के रूप में देखा जाता है। आप भी जानें क्या है ये मानसिक स्थिति।
मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जी नहीं सकता…और मैं भी… तो जब तक जिएंगे साथ जिएंगे… मरेंगे तो भी साथ। मध्य प्रदेश के रीवा में शादी के बाद पति-पत्नी बने दो प्रेमियों के बीच का ये संवाद एक दर्दनाक हकीकत में बदल जाएगा किसी ने सोचा भी नहीं था। अक्सर परिवार के बीच इस तरह के संवाद होने पर भी परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि ये संवाद तो प्रेम की भाषा हैं। लेकिन बीते रविवार को प्रेम की यह भाषा रियल परिवार की कहानी बन गई। दरअसल रीवा के एक युवा कारोबारी प्रदीप सोनी की मौत की खबर जब उसकी पत्नी वैशाली खड़ायत को पता चली तो उसने चंद मिनट भी नहीं गंवाए और आत्महत्या कर ली। सामने आया है कि पत्नी उस समय उत्तराखंड में थी।
प्रदीप सोनी के परिवार के मुताबिक प्रदीप सोनी और वैशाली खड़ायत ने वर्ष 2021 में प्रेम विवाह किया था। भावनात्मक रूप से दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े थे। परिवार का कहना था कि बातचीत के दौरान जब प्रदीप ने वैशाली से कहा था कि उसके बिना एक पल भी नहीं जी सकता, तो दोनों के बीच मीठी नोक-झोंक हुई थी। उसी समय वैशाली ने कहा था कि जब तक जिएंगे, साथ जिएंगे और साथ मरेंगे, क्योंकि वो पति के बिना अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकती।
मामले में मृतक प्रदीप सोनी के परिवार का कहना है कि बहू की आत्महत्या की खबर से वे बेहद दुखी हुए हैं। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि वह ऐसा कदम उठाएगी।
मामले को लेकर भोपाल के मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति की पहचान, सुरक्षा और भविष्य की कल्पना अपने जीवनसाथी से गहराई से जुड़ी होती है, तब उसकी अचानक मृत्यु कुछ लोगों में असहनीय भावनात्मक संकट पैदा कर सकती है। ऐसे समय व्यक्ति की सोच अस्थायी रूप से संकुचित हो जाती है और उसे लगने लगता है कि जीवन आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं रह गई। तब वह ऐसे आत्मघाती (Mental Health Alert on Rewa Suicide Case) कदम उठा सकता है।
डॉ. त्रिवेदी बताते हैं कि समाज अक्सर ऐसी घटनाओं (Mental Health Alert) को 'सच्चे प्रेम' के उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत करता है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से आत्महत्या को प्रेम का प्रमाण या आदर्श नहीं माना जाना चाहिए। यह अत्यधिक पीड़ा, निराशा और उस क्षण उपलब्ध भावनात्मक संसाधनों की कमी का संकेत हो सकता है।
Updated on:
10 Jun 2026 02:21 pm
Published on:
10 Jun 2026 01:25 pm
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