
bhopal city night view (file photo)
सुमित यादव
mp news: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में झोला छाप अपराधियों का नेटवर्क लगातार मजबूत और बेखौफ होता जा रहा है। पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बावजूद चारों जोन में अपराध पर लगाम लगाने में पुलिस फेल साबित हो रही है। इलाकों में रहने वाले झोला छाप गुंडे बिना पुलिस के डर से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। इन बदमाशों पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पुलिस रिकॉर्ड की बात करें तो राजधानी में 688 गुंडा और 47 हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं, जबकि 1000 से अधिक निगरानी बदमाश हैं। इसके अलावा 10 से ज्यादा सक्रिय गैंग हैं।
चौंकाने और चिंता की बात यह है कि कई बदमाश जेल जाते है फिर जमानत पर बाहर आते ही अपराध की दुनिया में लौट रहे हैं। हाल में हुए गंभीर अपराध में इस तरह के बदमाश नामजद हुए हैं। शहर में लगातार हो रहे अपराधों से पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। थानों में हिस्ट्रीशीटर और निगरानी बदमाशों पर नजर रखने के लिए क्राइम ब्रांच की विशेष टीमें बनाई गई हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर में हत्या, जानलेवा प्रयास, चोरी, लूट, चाकूबाजी और मारपीट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
शहर के ऐशबाग, निशातपुरा, छोला मंदिर, मंगलवारा, जहांगीराबाद, अशोका गार्डन, टीला, बजरिया और बैरागढ़ जैसे एरिया में ऐसे सड़क छाप बदमाशों की सक्रियता देखी जा रही है। इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई केस दर्ज करने तक ही सिमटी है।
गंभीर अपराधों की बात करें तो हत्या के मामलों में भी भोपाल में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। साल 2024 और 2025 में जहां 6-6 हत्या के अपराध दर्ज हुए थे, वहीं साल 2026 के पहले दो महीनों में ही आठ हत्या के मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस कमिश्नर भोपाल संजय कुमार का कहना है कि शहर में सक्रिय गैंग और हिस्ट्रीशीटरों पर निगरानी बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ बदमाशों की नियमित चेकिंग और सत्यापन भी किया जा रहा है।
Published on:
31 Mar 2026 09:23 pm
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