
AIIMS Bhopal में मरीजों को टांके लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है रेशम का धागा।
MP News: साड़ियों और अन्य कपड़ों के बाद अब नर्मदापुरम के रेशम का इस्तेमाल दवा बनाने में भी होगा। प्रोटीन, मलहम, क्रीम, सौंदर्य प्रसाधन उत्पाद बनाने में कोकून का इस्तेमाल होगा।
गांधी मेडिकल कॉलेज और एम्स में मरीजों के घाव पर रेशम के धागे से टांके भी लगाए जा रहे हैं। यह काम कट कोकून से हो रहा है। ऐसे में दवा कंपनियों की नजर नर्मदापुरम पर है। विभाग की मानें तो बेंगलूरुकी दवा कंपनी की टीम 23 जुलाई को नर्मदापुरम आएगी।
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में 500 और बैतूल जिले में 700 किसान रेशम उत्पादन से जुड़े हैं। किसानों से 130-500 रुपए प्रति किलो तक कोकून लिया जाता है। इससे बने रेशमी धागे से साड़ियां और अन्य कपड़े बनाए जा रहे हैं।
दवाइयां और सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों में रेशम का उपयोग होने से दोनों जिले के किसानों की आय बढ़ेगी। नदियों, पहाड़ों से घिरे जिले का वातावरण रेशम उत्पादन के लिए अच्छा है। इसलिए दुनिया का सबसे महंगा मूंगा रेशम भी पचमढ़ी में होने लगा है।
जिले से दवा कंपनियों को पर्याप्त कट कोकून मिलेगा। इससे नर्मदापुरम, बैतूल के किसानों की आय बढ़ेगी। 23 जुलाई को बेंगलूरु की दवा कंपनी की टीम रेशम केंद्र आ रही है।
-रविंद्र सिंह, रेशम अधिकारी, नर्मदापुरम
Updated on:
18 Jul 2024 04:42 pm
Published on:
18 Jul 2024 04:37 pm
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