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‘वोट चोरी’ पर सियासी गर्मी तेज, कोर्ट जाएगी कांग्रेस, मंत्री सारंग बोले- 20 महीने बाद क्यों जागी?

MP Politics Heated Up: मध्य प्रदेश में वोट चोरी पर सियासी गर्मी बढ़ी, जहां नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं अब उन्होंने कोर्ट जाने की तैयारी भी कर ली है, उधर मंत्री विश्वास सारंग ने मामले पर कांग्रेस को दो टूक जवाब दिया है...

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MP Politics Heated UP on Vote Chori

MP Politics Heated UP on Vote Chori(Photo: social media)

MP Politics on Vote Chori: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश में वोट चोरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राजधानी भोपाल में मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा, प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव के दो माह पहले ही लगभग 16 लाख नए मतदाता जोड़े गए। इसकी जानकारी न तो राजनीतिक दलों को दी और न ही प्रत्याशियों को। खास बात है कि निर्वाचन आयोग ने सीईओ को मतदाता सूचियों के इस अपडेशन को सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए थे।

सिंघार ने ऐसी 27 विधानसभा का डेटा भी साझा किया जहां कांग्रेस प्रत्याशी बहुत कम अंतर से हार, जबकि वहां उससे कहीं ज्यादा नए मतदाता जोड़े गए थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसको लेकर कोर्ट की शरण में जाएगी।

7 महीने में कैसे बढ़ गए 4.64 लाख मतदाता

नेता प्रतिपक्ष (Opposition Leader) ने बताया कि 5 जनवरी से 2 अगस्त 2023 (7 महीने) के दौरान मतदाताओं की संख्या में लगभग 4.64 लाख की वृद्धि दर्ज हुई। जबकि 2 अगस्त से 4 अक्टूबर 2023 (2 महीने) में मतदाताओं में 16.05 लाख की बढ़ोतरी हुई। सिंघार ने बताया कि 9 जून 2023 को भारत निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, मिज़ोरम, राजस्थान और तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि 1 जनवरी से 30 जून 2023 के बीच हुए जोड़-घटाव और संशोधनों को वेबसाइट पर प्रकाशित न किया जाए और न ही किसी के साथ साझा किया जाए।

8 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम

सिंघार ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के 2 दिसंबर 2022 के आदेश में जिलों को 8,51,564 नकली/डुप्लीकेट प्रविष्टियां हटाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन किसी भी जिला अधिकारी ने हटाने की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की। आरटीआइ से भी संबंधित डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया। गरुड़ ऐप' का स्रोतडेटा आरटीआइ में मांगने के बावजूद छिपाया गया है। नियम 32 के तहत निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी या ईआरओ द्वारा मतदाता सूची और उससे जुड़े दस्तावेज न्यूनतम 3 वर्ष तक संरक्षित रखने अनिवार्यता है।

एमपी एसईओ की वेबसाइट ठप, कांग्रेस ने कहा, चोरी पकड़े जाने का डर

मप्र मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की वेबसाइट का सर्वर ठप पडऩे से मंगलवार को सियासी घमासान शुरू हो गया। दोपहर में एमपी सीईओ की वेबसाइट को खोलने का प्रयास किया गया तो अंडर मेंटिनेंस का मैसेज बार-बार दिखाया जा रहा था। जिस पर एमपी सीईओ कार्यालय से बताया गया कि वेबसाइट का मेंटेनेंस एनआइसी द्वारा किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने इसे साजिश बताते हुए कहा कि मैंने वोट चोरी को लेकर जनता के सामने कई साक्ष्य प्रस्तुत कर खुलासा किया, अनियमितताओं की बात उठाई तो वैसे ही एमपी सीईओ का सर्वर डाउन हो गया। पहले भी ऐसा होता रहा है। आखिर चुनाव आयोग को किस चोरी के पकड़े जाने का डर है। जिसके चलते बार-बार वेबसाइट को बंद किया जा रहा है।

मंत्री सारंग की दो टूक- भ्रम न फैलाएं, तथ्य हो तो आयोग को हलफनामा दें

कथित वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस (MP Congress) पर भ्रम फैलाने के आरोप लगाए। भोपाल में मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, अगर नेता प्रतिपक्ष के पास वोट चोरी के कोई तथ्य है तो आयोग को हलफनामे के साथ जवाब दें।

कांग्रेस नेता कर रहे झूठी राजनीति

सांरग (MP BJP) ने आगे कहा, कांग्रेस के नेता जिन 27 विधानसभा सीटों को लेकर झूठ की राजनीति कर रहे हैं। उनको लेकर चुनाव आयोग में कितनी बार शिकायत की है। अगर 27 सीटों पर मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी थी तो सिंघार ये बताएं क्या इसको लेकर कोई आपत्ति चुनाव आयोग में दर्ज कराई है।

20 महीने बाद क्यों टूटी कांग्रेस की कुंभकर्णी नींद

उन्होंने कहा, विधानसभा चुनाव के 20 महीने बाद कांग्रेस की कुंभकर्णी नींद क्यों टूट रही है। कानून के अनुसार चुनाव परिणाम की घोषणा के 45 दिन के भीतर और चुनाव घोषित होने के बाद भी नामांकन की अंतिम तारीख से 10 दिन पहले तक शिकायत या चुनौती दी जा सकती है, तब कांग्रेस कहां थी? चुनाव पर आपत्ति इलेक्शन पिटिशन से की जा सकती है, न कि पत्रकार वार्ता करने से।