
MP Weather (एमपी समेत 14 राज्यों में अबतक कम बारिश Photo Source- Patrika)
MP Weather Update : देश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश के असामान्य पैटर्न ने चिंता बढ़ा दी है। मानसून सीजन के दो माह जून-जुलाई और अगस्त का एक सप्ताह गुजर जाने के बावजूद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान समेत 14 राज्य बारिश की भारी कमी झेल रहे हैं। पूरे देश में अभी तक सामान्य औसत बारिश 509.6 मिमी की तुलना में 451.9 मिमी बारिश यानी 11 फीसदी बारिश कम हुई है। वहीं, एमपी की बात करें तो यहां अबतक औसत से 20 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 10 दिन में कमी वाले राज्यों में मानसून की अच्छी बारिश नहीं हुई तो सूखे जैसे हालात बन जाएंगे। फसलों का उत्पादन गिरने पर खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका पर संकट बढ़ेगा। शहरों की पेयजल व्यवस्था, जलविद्युत व अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। चिंता इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि मानसून की बारिश का ट्रेंड अब पहले जैसा नहीं रहा। एक ही समय में कुछ प्रदेशों में भारी बारिश से बाढ़ आ रही है, वहीं दूसरे क्षेत्रों में कम बारिश से सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। ज्यादा बारिश वाले पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की कमी है। बारिश छोटे - छोटे लेकिन बहुत तीव्र स्पेल में हो रही है और सूखे के लंबे अंतराल बढ़ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में सीजन में यानी 1 जून से 7 अगस्त तक 427.3 मिमी औसत बारिश हुई है। सामान्य बारिश का आंकड़ा 533.6 मिमी है। यानी, 20त्न कम बारिश हुई है। इस माह अब तक बूंदाबांदी ही हो रही है। लोगों को तेज बारिश का इंतजार है। 55 जिलों में से सिर्फ भिंड, बुरहानपुर में ही औसत से ज्यादा बारिश हुई। 24 जिलों में सामान्य और 29 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। मध्यप्रदेश में रीवा ऐसा जिला है, जहां सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
देश के कई राज्यों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में कमी या अधिक शुष्क स्पेल सामने आ रहे हैं। राजस्थान के 18 जिलों में बारिश की कमी है, वहीं 6 जिलों में अधिक बारिश हुई है। छत्तीसगढ़ में 9 जिलों में बारिश की कमी है।
आइएमडी के मुताबिक, आगामी दो सप्ताह के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। अगले दो-तीन दिन में उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में तेज बारिश की संभावना है। पहले सप्ताह (12 अगस्त तक) में देशभर सामान्य बारिश का अनुमान है, जबकि, दूसरे सप्ताह में कुछ कम हो सकती है।
आइएमडी व कुछ विशेषज्ञ संस्थाओं के वैज्ञानिकों के बारिश के 124 साल के रिकॉर्ड के पैटर्न के अनुसार, बारिश पहले के सालों की तरह पूरे मौसम में बराबर नहीं हो रही। मौसम का ऐसा ही ट्रेंड रहा तो देश में कुछ जगहों पर बाढ़ और कुछ हिस्सों में सूखे का खतरा बढ़ सकता है। कई राज्यों में फसलों की बुवाई की रफ्तार नहीं बढ़ी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल 920.72 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस साल 31 जुलाई तक 894.22 लाख हेक्टयेर में बुवाई हुई है।
-जलवायु परिवर्तन : गर्म वातावरण से अधिक नमी बन जाती है। जब बारिश होती है तो वह बहुत भारी हो जाती है, जिससे बाढ़ बन जाती है। साथ ही शुष्क अवधि लंबी होने पर सूखे के हालात बन जाते हैं।
-अलनीनो : बड़े पैमाने के जलवायु पैटर्न अल नीनो का असर असर मानसून को कमजोर करता है।
-इंडियन ओशन डाइपोल: पॉजिटिव आइओडी भारत में अधिक बारिश ला सकता है और अल नीनो के प्रभाव को कम कर सकता है।
-मानवीय कारण : शहरीकरण, वनों की कटाई, आद्र्रभूमि का विनाश और भूमि उपयोग में बदलाव। कंक्रीट के कारण पानी जमीन में नहीं समाता है। इससे शहरों में बाढ़ बन जाती है।
-जेट स्ट्रीम : अटलांटिक के 'कोल्ड-लॉब' का जेट स्ट्रीम पर प्रभाव। जिससे बारिश उत्तर - पश्चिम की ओर शिफ्ट हो रही है।
Updated on:
08 Aug 2026 08:08 am
Published on:
08 Aug 2026 08:08 am
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