
भोपाल। प्रशासनिक लापरवाही ने बड़ा तालाब को पांच मीटर तक उथला कर दिया है। तालाबों पर हाल ही में हुए अध्ययनों में यह खुलासा हुआ है। स्थिति ये है कि बीते छह साल से जिला प्रशासन, जिला पंचायत या फिर नगर निगम की ओर से तालाब के भीतर की गाद हटाने का कोई काम ही नहीं किया गया। सेप्ट के मास्टर प्लान, दिल्ली की कंपनी व्यांस सोल्यूशन और अन्य एजेंसियों द्वारा बड़ा तालाब समेत अन्य तालाबों पर किए गए अध्ययन में लगातार बढ़ती गाद की ओर ईशारा किया गया है। जापान बैंक से तालाब संरक्षण के लिए मंजूर राशि के बाद बनाई डीपीआर में स्पष्ट किया गया था कि बड़ा तालाब में 5.9 मीटर तक और छोटा तालाब में 0.245 मीटर तक गाद जमा हो गई है। इससे जलभराव क्षमता 40 प्रतिशत तक कम हो गई।
गाद-अतिक्रमण की चपेट में तालाब
जहांगीराबाद वाले मोतिया तालाब का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। यहां सीमेंट-कांक्रीट का जंगल खड़ा हो गया है। इसी तरह गुरुबक्श की तलैया व अच्छे मियां की तलैया भी भोपालवासियों से अपने अस्तित्व की लड़ाई हार चुकी है। अस्तित्व के मामले में अंतिम सांस गिन रहे तालाबों में नवाब सिद्दिक हसन का नाम सबसे ऊपर है। भोपाल के ताल-तलैयाओं की स्थिति पर विभिन्न अशासकीय संगठनों द्वारा किए गए अध्ययन से पता चलता है कि नवाब सिद्दिक हसन तालाब के एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में से 98 प्रतिशत पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। महज दो प्रतिशत का हिस्सा बचा है। इसे भी जलकुंभी ने अपनी चपेट में ले लिया है। इसके बाद 1.05 हेक्टेयर के लेंडिया तालाब की स्थिति सबसे खराब है। इसका 82 प्रतिशत भाग गाद और कब्जे की चपेट में है। 113 हेक्टेयर के हथाईखेड़ा तालाब का भी 23 प्रतिशत भाग गाद-अतिक्रमण से भर गया। बड़े तालाब का 19 प्रतिशत, छोटे तालाब का 13 प्रतिशत, मुंशी हुसैन खां तालाब का सात प्रतिशत, मोतिया तालाब का दो प्रतिशत भाग गाद और कब्जे की भेंट चढ़ चुका है।
बड़ा तालाब
3201 वर्ग किलो मीटर का दायरा है तालाबों का
11वीं सदी में बना बड़ा तालाब
362 वर्गकिमी का है कैचमेंट एरिया
32 वर्गकिमी का है जलभराव क्षेत्र
11.64 मीटर है बड़ा तालाब की गहराई
508.65 मीटर है तालाब का अधिकतम वाटर लेवल
101.54 मिलियन क्यूबिक पानी जमा करने की अधिकतम क्षमता है
01 मीटर तक गाद जमा हो चुकी है तालाब में
03 मीटर न्यूनतम गहराई व 11.6 मीटर अधिकतम गहराई है
तालाब किनारे से हटाई जा रही मिट्टी
बड़ा तालाब किनारे भदभदा की ओर से वक्फ की जमीन और पास लगी कॉलोनियों के खुले क्षेत्र में जमा मिट्टी को हटाने की कवायद की जा रही है। जिला प्रशासन की टीम वक्फ बोर्ड की जमीन की नपती भी कर रही है। इस जमीन से मिट्टी हटाने का काम वक्फ बोर्ड ही कर रहा है। निगम के झील प्रकोष्ठ प्रभारी का कहना है कि किनारों की मिट्टी काफी हटा दी है।
तालबों से गाद हटाने की जरूरत है। नगर निगम तालाब संवद्र्धन के नाम पर राशि तो खर्च कर रहा, लेकिन गहरीकरण नहीं कर रहा।
-डॉ. सुभाष सी पांडेय, पर्यावरणविद्
तालाब में जंगली झाड़ और गाद बड़ी मात्रा में है। मैंने खुद कलेक्टर के साथ दौरा कर स्थिति देखी है। गहरीकरण शुरू होना जरूरी है।
-रामेश्वर शर्मा, विधायक
Published on:
11 Apr 2018 07:49 pm
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