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मंत्री विजय शाह के अधीन काम कर चुके उनकी जांच करने वाले अफसर! कांग्रेस ने उठाए सवाल

Vijay Shah- एमपी के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है।

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Minister Vijay Shah came out of the assembly after the uproar of Congress MLAs

Minister Vijay Shah came out of the assembly after the uproar of Congress MLAs (image-source-patrika.com)

Vijay Shah- एमपी के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तीन सदस्यीय एसआइटी गठित की गई है। कांग्रेस ने इस स​मिति की निष्पक्षता पर यह कहकर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है कि समिति में शामिल अफसर, मंत्री विजय शाह के अधीन काम कर चुके हैं।

मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अभद्र टिप्पणी की गई थी। इस पर देशभर में बवाल मच गया। प्रदेश के हाइकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर मंत्री विजय शाह पर केस दर्ज कराया। इसे निरस्त कराने आरोपी मंत्री
सुप्रीम कोर्ट गए जहां मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित करने को कहा गया।

देश की शीर्ष कोर्ट के निर्देश पर अमल करते हुए सोमवार रात को मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT बना दी गई है। डीजीपी कैलाश मकवाना ने एसआईटी का गठन करने का आदेश जारी करते हुए इनमें तीन आइपीएस अधिकारियों को रखा।

सरकार द्वारा गठित एसआईटी में सागर जोन के आईजी प्रमोद वर्मा, डीआईजी एसएएफ कल्याण चक्रवर्ती और डिंडोरी एसपी वाहिनी सिंह को शामिल किया गया है। तीनों आईपीएस अधिकारियों को विजय शाह मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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समिति गठित होते ही कांग्रेस ने इसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाया है। कांग्रेस का कहना है कि जिन अफसरों ने विजय शाह के अधीन काम किया उन्हें ही मंत्री की जांच सौंप दी गई है। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसपर अपने एक्स (X) एकाउंट पर पोस्ट भी किया है। इसमें उन्होंने समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने एक्स X पर लिखा-

कर्नल सोफिया क़ुरैशी पर दिए गए आपत्तिजनक बयान के मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ सरकार ने जो तीन सदस्यीय SIT गठित की है, उसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों से पता चला है -

  • SIT में शामिल IG प्रमोद वर्मा 2010 में SP खरगोन थे - उसी वक्त विजय शाह जिले के प्रभारी मंत्री थे।
  • D Kalyaan Chakravarty 2018 में SP खरगोन थे - उस समय विजय शाह वन मंत्री थे।

यानी जिन अफसरों ने पहले विजय शाह के अधीन काम किया, वही अब उनकी जांच करेंगे!
क्या ये जांच है या बचाव अभियान?

सरकार पर सवाल उठते हैं -
क्या सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देने के नाम पर सरकार आंखमिचौली खेल रही है? या फिर SIT की निष्पक्षता सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है?