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शादी के बंधन में बंधा उम्रदराज जोड़ा, घराती-बाराती बनी पुलिस, थाने से हुई विदाई

उम्र के आखिरी पड़ाव में मिला जीवन साथी, परिवार वाले तैयार नहीं थे इसलिए महिला थाने में हुई 62 वर्षीय सतना के लेक्चरर और भोपाल की 54 वर्षीय एलआईसी एजेंट की शादी।

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शादी के बंधन में बंधा उम्रदराज जोड़ा, घराती-बाराती बनी पुलिस, थाने से हुई विदाई

समाज में ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं, जब उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंचकर महिला और पुरुष एक दूसरे को अपना जीवन साथी बना लें। लेकिन ऐसा एक मामला सामने आया है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के महिला थाने में, जहां बाराती और घराती बनकर महिला थाना प्रभारी शिल्पा कौरव और उनकी टीम ने उम्र दराज जोड़ी को धूमधाम से विदा किया।

ये कहानी सतनाम की सरकारी स्कूल में मैथ्स के लेक्चरार 60 वर्षीय संतराम द्विवेदी और भोपाल में जीवन बीमा एजेंट का काम करने वाली 54 वर्षीय सुमन मिश्रा की है। एक पारिवारिक कार्यक्रम में संपर्क होने के बाद दोनों को एक दूसरे के विचार समान लगे। इसके बाद दोनों ने आपसी रजामंदी से एक दूसरे को अपना जीवन साथी बनाने का फैसला किया। लेकिन उनका रिश्ता साकार होना आसान नहीं था। क्योंकि दोनों के परिवार में दो-दो पुत्र मौजूद थे, जो इस विवाह के विरोध में थे। आखिरकार ये मामला भोपाल के महिला थाने पहुंचा, जहां सभी पक्षों को एक कमरे में बैठाकर आपसी रजामंदी के बाद जोड़े ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई और जीवनभर साथ निभाने की कसम भी खाई।

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परिवार को मनाना आसान नहीं था

संतलाल द्विवेदी और सुमन मिश्रा का फैसला उनके परिवार को बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था। संतलाल द्विवेदी की पत्नी की मृत्यु साल 2016 में हो गई थी, जबकि सुमन मिश्रा के पति का निधन भी साल 2016 में ही हुआ था। दोनों का भरा पूरा परिवार है, जो इस शादी के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था। विवाद जब बढ़ने लगा तोमामला महिला थाने पहुंच गया। काउंसलिंग के दौरान महिला थाना प्रभारी शिल्पा कौरवों ने दोनों के परिजन को बुलाया और बुजुर्ग दंपति के भविष्य का हवाला देकर उन्हें राजी कर लिया। बस फिर क्या था फटाफट मिठाई और फूल माला मंगवाई गई और दोनों को कानूनी रूप से एक दूसरे का पति-पत्नी बनाया गया।

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प्रॉपर्टी कर दी बच्चों के नाम

संतराम द्विवेदी और सुमन मिश्रा ने अपनी पूरी संपत्ति अपने परिजन के नाम कर दी है। पुलिस को बताए कथन में दोनों ने कहा कि उन्हें संपत्ति का कोई प्रलोभन नहीं है। वो अब सिर्फ शांति से अपना जीवन बिताना चाहते हैं। संतराम द्विवेदी सतना की सरकारी स्कूल में सीनियर लेक्चरार के पद पर नौकरी कर रहे हैं तो साल बाद उनका रिटायरमेंट है। उनका मानना है कि वो अपनी पेंशन से अपनी पत्नी का भरण पोषण आसानी से कर लेंगे।a