
Patrika Exclusive: लाखों खर्च कर सकते थे फिर भी 21 रुपए में हो गई ये अनोखी शादी
दूल्हा-दुल्हन को श्रमदान करने पर मिलते हैं 21 रुपए, श्रमदान से मिले 21 रुपए को आश्रम में करते हैं जमा,पूजा-पाठ, सात फेरे, हार-फूलों का खर्च उठाता है आश्रम, खरगौन के मां नर्मदा सेवा धाम आश्रम, बीड़ में संपन्प हुई शादी, सेवानिवृत्त कॉलेज प्राचार्य डॉ. पीएस कापसे कराते हैं यह पुण्य कार्य, समाज और जातियों का नहीं चलता जोर...।
भोपाल। जीवनभर साथ निभाने के लिए दो आत्माओं का पवित्र बंधन होता है विवाह। यह बंधन इतना आत्मिक होता है कि हर कोई इसे उम्रभर याद रखना चाहता है। दुनिया में कई शादियां ऐसी होती हैं जिसमें लाखों-करोड़ों तक खर्च किए जाते हैं। लेकिन, क्या आप यकीन करेंगे कि शादी समारोह के चकाचौंध से दूर कोई मात्र 21 रुपए खर्च में भी शादी कर सकता है। वह भी पूरी रीति-रिवाजों के साथ।
जी, बिल्कुल। मध्यप्रदेश में ऐसा ही अनोखा विवाह हुआ है, जिसमें मात्र 21 रुपए खर्च किए गए। वह 21 रुपए भी दूल्हा-दुल्हन ने श्रमदान करके कमाए थे।
ऐसे हुई 21 रुपए में शादी
बुद्ध पूर्णिमा के दिन खरगौन जिले के बीड़ में यह विवाह सभी रस्मों के साथ हुआ है। यह अनोखा विवाह इंदौर के डॉ. राजेश लाल मेहरा और भोपाल की डॉ. माधुरी यादव के बीच संपन्न हुआ है। इसके लिए नवदंपती ने मात्र 21 रुपए खर्च किए और विवाह हो गया।
दूल्हा MPPSC में, तो दुल्हन अनुसंधान अधिकारी
इस शादी की खास बात यह भी है कि लाखों रुपए खर्च करने की क्षमता के बावजूद 21 रुपए में विवाह करने का विचार आया तो दूल्हा-दुल्हन दोनों ही सहमत हो गए। डॉ. राजेश लाल मेहरा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में सदस्य हैं और उनकी पत्नी डॉ. माधुरी यादव भोपाल स्थित में जनजाति कार्य विभाग में सहायक अनुसंधान अधिकारी हैं। डॉ. मेहरा का गृहनगर महू है और डॉ. माधुरी गवलीपलासिया की रहने वाली हैं।
दूल्हा-दुल्हन को श्रमदान के बदले मिली थी 21 रुपए मजदूरी
डॉ. मेहरा बताते हैं कि दोनों ही परिवार के लोग खरगौन के बीड़ में स्थित मां नर्मदा सेवा धाम से जुड़े थे। वहां से संस्थापक डा. पीएस कापसे के संपर्क में रहने के कारण उन्होंने 21 रुपए में विवाह का प्रस्ताव रखा, तो सभी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। शादी से पहले श्रमदान करने को कहा गया। तो हमने भी गैती-फावड़ा उठाया और परिसर को संवारने में जुट गए। इस काम में माधुरी ने भी दिल से सहयोग किया। इसके बाद हमें पारिश्रमिक के रूप में 21 रुपए दिए गए। इन रुपयों को आश्रम में जमा कर दिया। इस दान के बदले हमारे विवाह के लिए सारी व्यवस्थाएं की गईं और हार-फूल, पूजन सामग्री, मेहमानों का भोजन प्रसाद, ठहरने की व्यवस्था भी आश्रम में की गई।
खरगौन में है यह आश्रम
बड़वानी के पीजी कॉलेज के प्राचार्य रहे डा. पीएस कापसे ने समय से पहले ही सेवानिवृत्ति ले ली और नर्मदा सेवा में जुट गए। उन्होंने खरगौन जिले के बीड़ में हाल ही में यह आश्रम डॉ कापसे के सान्निध्य में बना है। मां नर्मदा सेवा धाम नामक इसी आश्रम में यह पहला विवाह हुआ है। डॉ. कापसे ने पत्रिका को बताया कि यह आश्रम मां नर्मदा के प्रति समर्पित है और यहां किसी जाति धर्म का बंधन नहीं होता है।
ऐसे मिली मिली प्रेरणा
भोपाल में सहायक अनुसंधान अधिकारी डॉ. माधुरी यादव ने पत्रिका को दिए साक्षात्कार में बताया कि हम चाहते थे कि फिजूल खर्च की बजाय हमारा पैसा सदकर्म में लगे। ईश्वर ने हमें इसलिए सक्षम बनाया कि हम समाज और राष्ट्र के काम आ सके। डा. कापसे के साथ ही पीएससी के पूर्व चेयरमैन और वर्तमान चेयरमैन का हमारी शादी में बड़ा योगदान है। सभी के प्रयासों से यह रिश्ता बना और मात्र 21 रुपए में विवाह संपन्न हुआ। डा. माथुरी ने कहा कि मैं गरीब माता-पिता को भी कहती हूं कि आप भी अपने बेटे और बेटियों का विवाह इस आश्रम में मात्र 21 रुपए के खर्च में कर सकते हैं।
मां नर्मदा सेवा धाम पर एक नजर में
-सबसे पहले नरसिंहानंद महाराज ने अलीराजपुर में स्थापित किया था सनातन सेवा आश्रम।
-इसके बाद खरगौन जिले के बीड़ में मां नर्मदा सेवा धाम की स्थापना हुई। इसके संस्थापक डा. पीएस कापसे हैं।
-डा. कापसे के सान्निध्य में भी सभी कार्य संपन्न होते हैं।
-इस आश्रम में विवाह जैसे मांगलिक कार्य मात्र 21 रुपए में संपन्न कराए जाते हैं।
-नवनिर्मित आश्रम में 30 अप्रैल को बुद्धपूर्णिमा के दिन यह पहला विवाह कराया गया।
-विवाह से पहले दूल्हा-दुल्हन को आश्रम में करना पड़ता है श्रमदान।
-उत्तर कार्य भी 11 रुपए में संपन्न कराए जाते हैं।
-इसी खर्च में पूरा कार्यक्रम विधिवत पूरा कराया जाता है।
सोशल मीडिया ने की इस शादी की तारीफ
महंगाई के जमाने में इतने कम खर्च में हुई इस शादी पर सोशल मीडिया ने भी काफी सराहना की है।
-मनीष वैद्य लिखते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा पर गोबर से लीपे आंगन में सादगी से आत्मीय वातावरण में हुआ। सुबह-सुबह मुस्कुराते हुए दोनों ने एक-दूसरे को पुष्पहार पहनाए, सात फेरे हुए, इसमें न तो बैंड -बाजा था, न ही ढेर सारे मेहमान, न डीजे की कानफोडू आवाज़, न चोंचलेबाजी, घोड़ी भी नहीं आई, बिजली की साज-सज्जा और बाक़ी दिखावे का तो खैर सवाल ही नहीं।
-परिधि सोनी ने नवदंपती के सहज व्यवहार की सराहना करते हुए कहा है कि यह प्रेरणा लेने वाला कदम है।
-कविता सूर्यवंशी ने 21 रुपए में इतने अच्छे कार्य को अनुकरणीय बताया है।
Updated on:
10 Jun 2018 10:01 am
Published on:
10 Jun 2018 09:00 am
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