
जनजातीय गौरव दिवस से PM मोदी ने बगाया चुनावी बिगुल, जानिए भाषण की 5 बड़ी बातें
भोपाल. जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल के दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदिवासियों के संबोधन से अघोषित 2024 के चुनावों को साधने का प्लेटपॉर्म तैयार कर लिया है। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कई चुनावी स्ट्रोक लगाए। पीएम आदिवासियों को 'राम' से जोड़कर आने वाले चुनाव का एजेंडा भी सेट कर गए। अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि, वनवासियों के साथ बिताए गए समय ने ही राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया है।
जंबूरी मैदान में अपने 30 मिनट से अधिक समय के भाषण में पीएम ने केंद्र की कई योजनाओं पर रोशनी डाली। खासतौर पर उन्होंने आदिवासी समुदाय को ये बताने का प्रयास किया कि, भारत की सांस्कृतिक यात्रा और आजादी की अलख जगाने में उनकी अग्रणी भूमिका रही, लेकिन पिछली सरकारों ने स्वार्थ भरी राजनीति को ही प्राथमिकता दी। आने वाले चुनावों में आदिवासियों के बीच जाने के लिए बीजेपी के मुद्दे क्या होंगे? इसके संकेत भी अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने दिए। तो आइये जानते हैं प्रधानमंत्री द्वारा कही गई उन बड़ी बातों के बारे में जिनके बारे में गौर करना सभी के लिए जरूरी है....।
-राम और आदिवासी इस तरह जोड़े
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, भगवान श्रीराम के जीवन में आदिवासियों को कितना महत्व था? इसे बताते हुए कहा कि, भारत की सांस्कृतिक यात्रा में जनजातीय समाज का अटूट योगदान रहा है। जनजातीय समाज के योगदान के बिना प्रभुराम के जीवन की सफलताओं की कल्पना नहीं है। वनवासियों के साथ बिताए समय ने एक राजकुमार को मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनाया। उस कालखंड में श्रीराम ने वनवासी परंपरा, रहन-सहन जीवन जीने के तौर तरीकों को गहराई से जाना।
-कांग्रेस पर किया हमला
पीएम ने अपने भाषण में इस बात पर देते हुए कहा कि, आदिवासियों के योगदान को छिपाने का काम कांग्रेस ने किया है। मोदी ने कहा कि, आजाद भारत में जनजातीय योगदान के बारे में बताया ही नहीं गया। उसे अंधेरे में रखने का प्रयास किया गया। सिर्फ सीमित बातें ही बताई गईं। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दशकों तक जिन्होंने देश में सरकार चलाई, उन्होंने स्वार्थ भरी राजनीति को ही प्राथमिकता दी। देश की आबादी का करीब 10 फीसदी होने के बावजूद दशकों तक आदिवासियों के सामर्थ्य को नजरअंदाज करके रखा गया। आदिवासियों के दुख-तकलीफों का कोई मोल नहीं रखा गया।
-कांग्रेस ने सिर्फ आदिवासियों को वोट बैंक समझा- पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि, अबतक जो आदिवासी पिछड़े हुए हैं, उसकी सिर्फ और सिर्फ जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि, मैंने दशकों पहले जब सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी, तभी से देखता आया हूं कि, देश में कुछ राजनीतिक दलों ने विकास और सुविधाओं से आदिवासी समाज को वंचित रखा। अभाव बनाए रखते हुए चुनावों में उन्हीं अभाव के नाम पर कई बार वोट भी मांगे गए। जनजातीय समाज जो और जितना करना चाहिए था, ये इन्होंने नहीं किया। यही वो लोग हैं, जिन्होंने समाज को असहाय छोड़ दिया।
-बीजेपी को पीएम ने बताया आदिावासियों का हमदर्द
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बार बार यही समझाने का प्रयास किया कि, असल में भाजपा ही आदिवासियों की हमदर्द है। उन्होंने ये भी कह कि, इस समाज का उत्थान सिर्फ बीजेपी ही कर सकती है। उन्होंने कहा कि मैंने गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद आदिवासियों के लिए कई प्रयास किए थे। जब 2014 में देश की सेवा का मौका मिला तो जनजातीय समाज के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए केंद्र सरकार की ओर से इनके हितों के लिए कई योजनाएं बनाईं, जिन्हें पीएम ने गिनाया भी।
-गांधी जयंती की तरह हर साल मनाई जाएगी बिरसा मुंडा जयंती
अपने भाषण में पीएम ने ये कहने का प्रयास किया कि, जिस तरह देश में महात्मा गांधी का सम्मान है, उसी तरह अब बिरसा मुंडा (आदिवासी जिसे भगवान मानते हैं) को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि, हम इस संकल्प को फिर दोहरा रहे हैं कि, जैसे हम गांधी जयंती मनाते हैं, सरदार पटेल, डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती मनाते हैं, वैसे ही 15 नवंबर को अमर शहीद बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में देशभर में मनाई जाएगी।
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Published on:
15 Nov 2021 10:03 pm
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