प्रदेश में बसपा का प्रभाव 110 सीटों पर सीधे तौर पर है। जिनमें उत्तर प्रदेश से लगी हुई बुंदेलखंड की 26, ग्वालियर-चंबल की 34, विंध्य की 30 और महाकौशल की 20 सीटें हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए बसपा के साथ खड़े होना कहीं न कहीं, भविष्य की संभावनाओं को जन्म देगा। इतना ही नहीं, बसपा भी भविष्य में कांग्रेस से इस समझौते की कीमत जरूर लेगी। अब यह कीमत क्या होगी, यह तो 2018 के चुनावों में ही पूरी तरह से साफ नजर आएगा, लेकिन एक बात साफ है कि भाजपा की राजनीतिक चाल ने उसे ही दोहरी मात दी है। कुल मिलाकर भाजपा को अपनी ही रणनीतिक चाल से एक बड़ी राजनीतिक हार झेलनी पड़ी है।