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रवींद्र भवन : पिता ने पाकिस्तान से मंगवाया था ताऊस

रवींद्र भवन में पद्मश्री उस्ताद अब्दुल लतीफ खां स्मृति समारोह शुरू.. ताऊस 34 साल के संदीप ने रवीन्द्र भवन में बजाया

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भोपाल। रवींद्र भवन में संस्कृति विभाग और उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी की ओर से आयोजित पद्मश्री उस्ताद अब्दुल लतीफ खां स्मृति समारोह में 'दुर्लभ वाद्य प्रसंग' कार्यक्रम का आगाज हुआ। इसमें लोगों को ऐतिहासिक वाद्य यंत्रों की तरंगों को सुनने का मौका मिलेगा। समारोह की शुरुआत गुरुवार को 17वीं शताब्दी के वाद्ययंत्र 'ताऊस' के वादन से हुई। इसे मयुरीवीणा के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान जालंधर के संदीप सिंह ने 'ताऊस' की 30 मिनट की प्रस्तुति से श्रोताओं को प्राचीन संगीत का अनुभव कराया।

उन्होंने राग चारूकेशी का चुनाव करते हुए पंजाब की प्रसिद्ध भैरवी में हीर की प्रस्तुति दी, जो विलंबित तीन ताल और एक ताल में निबद्ध रही। संदीप ने बताया कि इस वाद्य यंत्र ? को उनके पिता तरलोचन सिंह ने 11 साल की उम्र में लाकर दिया था। इसे उन्होंने पाकिस्तान से मंगवाया था। इसके बाद संदीप ने अपने गुरु मनुकुमार से 'ताऊस' को बजाना सीखा। वे कहते हैं कि 'ताऊस' वाद्य यंत्र सारंगी और सितार का मिश्रण है। जैसे सांरगी को बजाया जाता है वैसे ही 'ताऊस' को भी।

2006 में स्वर्ण मंदिर में बजाया था 'ताऊस'

संदीप कहते हैं कि जब 2006 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में वाद्ययंत्रों को बजाने की अनुमति मिली थी तब मुझे भी वहां ताऊस बजाने का मौका मिला। फिर मैंने जत्थे के साथ ताऊस बजाया था। इसके बाद मुझे लोगों की बहुत प्रशंसा मिली थी। उन्होंने बताया कि ताऊस को एकल और संगत में यूज किया जाता है। परशियन में मोर को ताऊस कहते हैं उससे ही इस वाद्य यंत्र का नाम 'ताऊसÓ पड़ा।

उस्ताद लतीफ खां के शिष्यों ने छेड़ी तान

कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति सांरगी वृंद की रही। इसमें उस्ताद अब्दुल लतीफ खां के शिष्यों ने सारंगी की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसमें कलाकार जावेद खान और हनीफ हुसैन ने राग सरस्वती का चुनाव करते हुए बंदिश दी। उन्होंने मध्यलय में द्रुत तीन ताल और द्रुत एक ताल में बंदिशें पेश की। इस आधे घंटे की प्रस्तुति से इन कलाकारों ने उस्ताद अब्दुल लतीफ खां के संगीत की यादें ताजा कर दीं। इनके साथ तबले पर शहनावाज हुसैन, अजगर अहमद और आमिर खान ने संगत दी।

पिता और पुत्रों की जोड़ी मंच पर

कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति शहनाई की रही। इसमें नई दिल्ली के दया शंकर और पुत्र अश्विनी शंकर, संजीव शंकर और आनंद शंकर की जोड़ी मंच पर उतरी। इन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति में श्याम कल्याण में विलंबित एक ताल और द्रुत तीन ताल में बंदिशें पेश कीं। इसके बाद उन्होंने बनारसी ठुमरी और दादर की प्रस्तुति दी।

इनका हुआ सम्मान

समारोह के दौरान अंलकरण समारोह में दो कलाकारों का सम्मान किया गया। इसमें शहनाई वादक दया शंकर और ताऊस वादक संदीप सिंह को उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया।