
रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानि रेरा एक्ट लागू होने के सात साल बाद भी अफसर इसे राजधानी में लागू नहीं करवा पा रहे। यही वजह है कि शहर किनारे धड़ल्ले से खेती की जमीन पर बसाहटें हो रही है। बुधवार को ही करोंद क्षेत्र में ऐसी बसाहटों को हटाने के लिए प्रशासन के साथ निगम ने कार्रवाई की। हालांकि ये महज दिखावटी है। इस समय शहर में बिना रेरा पंजीयन के 90 से अधिक प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
इन पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी समय में नई अवैध बसाहटें होंगी और फिर शासनप्रशासन के सामने यहां रहने वालों को सुविधाएं विकसित करने से लेकर कॉलोनियों को वैध कराने की नई चुनौती होगी। भोपाल नगर निगम प्रभारी आयुक्त रघुवीर सैनी कहते हैं कि बिना रेरा पंजीयन विकसित व विक्रय ह्रश्वलॉट्स को लेकर संबंधित अफसरों से जांच करवाकर कार्रवाई कराएंगे।
रेरा पंजीयन के लिए डेवलपर्स को 28 दस्तावेज की जरूरत होती है। इसकी ऑनलाइन मॉनीटङ्क्षरग के साथ पैसों का पूरा हिसाब भी रखना होता है। इससे ही बचने के लिए अवैधतौर पर बसाहटें की जा रही है।
रेरा एक्ट लोगों को प्रॉपर्टी में धोखाधड़ी से बचाने एक मई 2017 में लागू किया गया था। किसी भी प्रॉपर्टी का व्यवसायिक तौर पर क्रय विक्रय किया जा रहा है तो उसका रेरा पंजीयन जरूरी है। इसमें कहीं प्लाट बेचने से लेकर दुकान- मकान बनाकर बेचने तक शामिल है। ऐसा नहीं करने वाले पर कार्रवाई के प्रावधान है। जिला प्रशासन व निगम प्रशासन के अफसरों को इसे लागू करना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति से लग रहा है वे जिम्मेदारी का पालन नहीं कर रहे।
बिना रेरा पंजीयन के प्रॉपर्टी विक्रय का प्रचार नहीं किया जा सकता है, लेकिन छोटे बोर्ड, फ्लेक्स, कटआउट व पंपप्लेट, सोशल मीडिया से प्रचार कर प्रॉपर्टी विक्रय की जा रही है।
15 बसाहटें नीलबड़-रातीबड़ सीहोर रोड पर
32 बसाहटें करोद की ओर आगे तक
14 बसाहटें कोलार के गेहूखेडा, बैरागढ़ चिचली से आगे कजलीखेड़ा तक
08 से अधिक बसाहटें इंदौर रोड पर
11 अन्य क्षेत्रों में
Updated on:
08 Mar 2024 03:05 pm
Published on:
08 Mar 2024 02:47 pm
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