
छोटी हाइट वाले लोग होते हैं बेहद भाग्यशाली, ये बातें होती हैं खास,छोटी हाइट वाले लोग होते हैं बेहद भाग्यशाली, ये बातें होती हैं खास,छोटी हाइट वाले लोग होते हैं बेहद भाग्यशाली, ये बातें होती हैं खास
भोपाल/ इंसान की सुंदरता और आकर्षण का मुख्य कारण उसकी हाइट भी होती है। ये बात तो हम सभी जानते हैं कि, जिन लोगों की हाइट अच्छी होती है वो किसी छोटी हइट के लोगों के सामने ज्यादा आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि, अकसर कम हाइट वाले लोग इसे लेकर परेशान रहते हैं। कई लोग अपनी हाइट बढ़ाने के लिए कई जतन भी करते हैं, जैसे व्यायाम या ट्रीटमेंट। लेकिन, इस सब के बावजूद भी हाइट बढ़ ही जाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं रहती।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
कम हाइट वाले लोग अकसर इस बात को लेकर डरते हैं कि, कहीं कोई उनकी छोटी हाइट को लेकर मजाक न बनाए। लेकिन, हाल ही में हुई एक रिसर्च छोटी हाइट के लोगों की इस समस्या का निदान किया है। इसका हवाला दिया, जानी मानी हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. चित्रा भाटिया ने। उनका कहना है कि, अगर आप अपनी कम हाइट को अपने शरीर की कमी मानते हैं तो ये बात सुनने के बाद आप उसे अपनी खूबी समझने लगेंगे।
ये है छोटी हाइट का फायदा
डॉ. चित्रा ने बताया कि, रिसर्च में खुलासा हुआ है कि, लंबी हाइट वाले लोगों के शरीर में खून का थक्का बनने के चांस काफी ज्यादा होते हैं और रक्त का थक्का बन जाने के कारण हार्ट अटैक, लकवा और मस्तिष्क आघात होने की संभावनाएं काफी अधिक हो जाती है। इस शोध को करने वाले प्रोफेसर के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि, लंबे लोगों को इन सबका खतरा धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की वजह से ज्यादा होता है। दरअसल, ग्रेवीटी की वजह से लंबी हाइट के लोगों के शरीर में रक्त प्रवाह ज्यादा ऊपर जाने की वजह से इन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
कम हाइट वालों पर 65 फीसदी कम रहता है खतरा
डॉ. चित्रा के मुताबिक, मेडिकल भाषा में इसे 'वेनस थ्रॉम्बोसिस' नाम से जाना जाता है। यानी, जैसे-जैसे किसी व्यक्ति की हाइट बढ़ती है वैसे वैसे उसके शरीर में खून का थक्का जमने की संभावना बढ़ती जाती है। रिसर्च के अनुसार 6 फुट 3 इंच की हाइट वाले लोगों के मुकाबले 5 फुट 3 इंच हाइट वाले लोगों को इस बीमारी के लगने का खतरा 65 प्रतिशत कम होता है। साथ ही, इंसान के शरीर की नसों की लंबाई ज्यादा होने की वजह से ग्रेविटी के ऊर्ध्वाधर के प्रभाव से रक्त का प्रवाह एक ऊंचाई पर जाकर रूक सकता है, जो खून का थक्का बनने की संभावनाएं बढ़ाता है। हालांकि, ये बात अभी पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। बता दें कि, डिस शोध का हवाला डॉ. चित्रा ने दिया उसे साल 1951 से लेकर 1992 के बीच पैदा हुए 12 लाख पुरुषों और साल 1982 से लेकर साल 2004 के बीच गर्भवती हुई करीब 10 लाख महिलाओं पर किया गया था।
Published on:
16 Nov 2019 06:53 pm
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