
AIIMS: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एम्स में स्किन बैंक शुरू होने जा रही है। इससे गंभीर रूप से झुलसे मरीजों की जान बचाने में मदद मिलेगी। यह बातें एम्स के निदेश डॉ. अजय सिंह द्वारा कहीं गई। वे बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाग आने वाले समय के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करके आगे बढ़ रहा है। अब विभाग को आउटरीच एक्टिविटीज बढ़ाने पर जोर देना है। खास तौर पर जलने के मामलों में किस तरह से प्राथमिक उपचार करना चाहिए, इसके अलावा बचाव के तरीके भी लोगों तक पहुंचाने का कार्य करेगा।
बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. मनल खान ने कहा कि साल 2013 से अब तक 22 हजार से अधिक सर्जरी की जा चुकी हैं। हर महीने 75 से 80 मेजर सर्जरी की जाती हैं। ओपीडी के मामले पिछले सालों में 63 से बढ़कर 97 सौ हो गए हैं। इस साल ही अकेले शुरुआती छह माह में 57 सौ मरीजों को इलाज मुहैया कराया गया।
एम्स के चिकित्सकों के मुताबिक 30 फीसदी से ज्यादा झुलसे मरीजों का सर्वाइवल मुश्किल होता है। इसका कारण मरीजों के शरीर से फ्लूड का लगातार निकलते रहना है। स्किन ग्राफ्टिंग से ऐसे मरीजों को जीवनदान मिल सकेगा। बैंक में स्किन को करीब 5 साल तक सुरक्षित रख सकते हैं।
जिस तरह ब्रेनडेड मरीज के हार्ट, लिवर, किडनी और समेत अन्य अंगों से दूसरे मरीजों की जान बचाई जाती है। इसी तरह स्किन भी बर्न केसेज के मरीजों की जान बचा सकेगी। ब्रेनडेड मरीज की जांघ, पैरों और पीठ से स्किन ली जाती है। यह सिर्फ जलने वालों में ही नहीं बल्कि चोट लगने में और स्किन की अन्य बीमारियों में भी काफी मददगार है।
जैसे ऑर्गन डोनेट करने से पहले दानदाता की पूरी जांच की जाती है। वैसे ही त्वचा लेने से पहले कैंसर, एचआईवी, स्किन इन्फेक्शन, हेपेटाइटिस बी, सी, टीबी, की जांच की जाती है। अगर रिपोर्ट निगेटिव है तो स्किन ली जा सकती है। पॉजिटिव होने पर त्वचा नहीं ली जाएगी।
Updated on:
16 Jul 2024 08:43 pm
Published on:
16 Jul 2024 08:42 pm
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