
indira gandhi temple in madhya pradesh
भोपाल। मध्यप्रदेश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का मंदिर है। यहां रोज विधिवत पूजा-अर्चना के साथ ही भंडारे का भी आयोजन होता है। यहां अक्सर कांग्रेस के बड़े नेता दर्शन करने आते हैं। इंदिरा गांधी का यह मंदिर इंदौर के केईएच कंपाउंड व सीआरपी लाइन में है।
हाल ही में एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने 100 से ज्यादा स्टाफ क्वार्टर तोड़ने का नोटिस दिया था। इसके जवाब में कब्जाधारी ने तर्क दिया था कि यहां पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी का मंदिर बना हुआ है। कांग्रेस के बड़े नेता मूर्ति के दर्शन करने आते हैं, इसलिए नए अस्पताल की बाउंड्रीवाल का काम रोक दिया जाए।
केईएच कंपाउंड व सीआरपी लाइन में कॉलेज की जमीन पर 100 से ज्यादा स्टाफ क्वार्टर बने हुए हैं। 23 स्टाफ क्वार्टर बेहद जर्जर हैं। इन्हें तोड़कर सुपर स्पेशलिटी प्रोजेक्ट को एमवायएच व ओपीडी से जोड़ने के साथ ही स्टाफ क्वार्टर की इमारत बनाने की योजना तैयार हो रही है।
क्वार्टर खाली कराने के लिए वर्षों से प्ररक्रिया चल रही है। इसके लिए इस वर्ष 5 जनवरी और 23 फरवरी को भी नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासन ने रिमूवल टीम भी भेजी, लेकिन विरोध के कारण लौटना पड़ा था। कब्जा हटाने की कार्रवाई को लेकर दिनेश शर्मा ने वकील के माध्यम से निर्माण एजेंसी ब्रिज एंड रूफ को नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि वे सीआरपी लाइन में अहिल्या मानस मंडल का संचालन 60 सालों से कर रहे हैं।
आश्रम में भगवान की प्रतिमाओं के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी मंदिर बना है। इसकी विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। पुण्य तिथि पर भंडारा भी होता है। कांग्रेस के बड़े नेता और जनता हिस्सा लेती है। निर्माण कंपनी को 4.5 गुणा 90 मीटर जमीन पर बनाई जाने वाली बाउंड्रीवॉल का काम रोका जाए।
कोर्ट में चल रहा है केस
इस मामले में एमजीएम डीन डा. ज्योति बिंदल ने तीसरी बार नोटिस जारी कर मध्यप्रदेश लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम का हवाला देते हुए केस दर्ज कराने की चेतावनी भी दी थी। मामला भाड़ा नियंत्रण कोर्ट में फिलहाल विचाराधीन है।
खरगौन में भी है एक मंदिर, रोज होती है पूजा
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के आदिवासी अंचल के पाडल्या गांव में भी इंदिरा गांधी का एक मंदिर है। यहां के आदिवासी देवी मानकर रोज पूजा-अर्चना करते हैं। यह मंदिर आदिवासी कांग्रेस नेता सुखलाल पटेल ने 31 साल पहले यह मंदिर बनवाया था। मंदिर की स्थापना के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अर्जुन सिंह समेत कई कांग्रेस नेता पूजा करने पहुंचे थे। यहां आदिवासियों का आज भी पूजन चलता है। खास बात यह है कि शादी समारोह समेत अन्य खुशी के कार्यक्रमों के पहले समाज के लोग मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। पाडल्या गांव खरगौन से 80 किमी दूर विकासखंड झिरन्या में है।
विरोध भी हुआ था
14 अप्रैल 1986 में जब मंदिर का लोकार्पण हुआ था। इससे पहले जब निर्माण किया जा रहा था तब भाजपा ने विरोध किया था और कोर्ट तक चले गई थी। बताया जाता है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी लोकार्पण में आने वाले थे, लेकिन श्रीलंका में उन पर बंदूक का कुंदा मारने की घटना के बाद वे नहीं आ सके थे। इसके बाद अर्जुन सिंह को मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में भेजा था।
Published on:
30 Dec 2019 05:48 pm
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