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‘रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला पलट सकता है चुनाव आयोग’ मीनाक्षी नटराजन केस में कांग्रेस नेता का बयान

Meenakshi Natarajan Nomination Case- प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं, जिसे बताना था, दिल्ली में आज कांग्रेस की अहम बैठक

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Statement by Congress leader Abhishek Singhvi regarding the Meenakshi Natarajan case

Meenakshi Natarajan nomination मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर फैसला (फोटो सोर्स- ANI)

Meenakshi Natarajan - मध्यप्रदेश में राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन Meenakshi Natarajan का नामांकन निरस्त कर दिए जाने के मामले में नई दिल्ली में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में शामिल कांग्रेस नेताओं ने आयोग से कहा कि नटराजन का ऐसा कोई मामला नहीं, जिसे बताना था। नामांकन में नियमानुसार सभी जानकारियां दी गई हैं। महासचिव केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मिले प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, विवेक तन्खा, अभिषेक मनु सिंघवी भी थे। कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने बताया कि आयोग के पास रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला बदलने या उसे रद्द करने का पूर्ण अधिकार है। कुछ केसेस में ऐसा किया भी जा चुका है। हालांकि चुनाव आयोग ने कांग्रेस को अभी तक कोई राहत नहीं दी है।

दिल्ली में आज कांग्रेस की अहम बैठक

कांग्रेस ने गुरुवार को दिल्ली में सभी महासचिव, प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों की अर्जेंट बैठक बुलाई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में होने वाली बैठक में राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन Meenakshi Natarajan का नामांकन निरस्त करने समेत अन्य मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।

आयोग ने दो घंटे में फैसला बताने को कहा लेकिन शाम तक अधिकृत फैसला नहीं

चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हमने आयोग के सामने तथ्य रखकर मांग की है कि निर्वाचन अधिकारी का फैसला पलटें। आयोग ने दो घंटे में फैसला बताने को कहा था लेकिन शाम तक अधिकृत फैसला नहीं आया। सूत्रों ने बताया कि आयोग ने कांग्रेस को कोई राहत नहीं दी है।

अभिषेक मनु सिंघवी के तर्क

  1. किसी भी आपराधिक मामले में सबसे पहले मजिस्ट्रेट तय करते हैं कि सुनवाई होगी या नहीं। इसे संज्ञान लेना कहते हैं। जब तक कोर्ट संज्ञान नहीं लेती, मामला शुरू हुआ नहीं माना जाता।
  2. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक प्रत्याशी को सिर्फ उन मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें दो साल या ज्यादा की सजा का प्रावधान है। जिनमें कोर्ट आरोप तय कर चुकी हो। यह जांचना रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी है।
  3. इस मामले में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया है। जांच होगी। चालान पेश होगा। आरोप तय होंगे। कई कानूनी प्रक्रियाएं बाकी हैं। फिर भी रिटर्निंग ऑफिसर ने लंबित केस मान नामांकन रद्द किया।
  4. चुनाव आयोग के पास रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला बदलने/रद्द करने का अधिकार है। आयोग पहले हरियाणा, गुजरात के केस में ऐसा कर चुका है। इसमें भी कार्रवाई हो सकती है।