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अगर मांगें नहीं मानी तो बंद हो सकता है सांझा चूल्हा.. देखें पूरा मामला!

महिलाओं ने सत्रह सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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भोपाल/रायसेन। प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ के आव्हान पर मंगलवार को दोपहर महिला स्व-सहायता समूह महासंघ रायसेन द्वारा महिलाओं ने अपनी सत्रह सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। मंगलवार को दोपहर महामाया चौक में एकत्रित होकर महिलाओं द्वारा चिलचिलाती धूम में करीब ढ़ाई किमी तक पैदल रैली निकाली ।इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम संबोधित ज्ञापन कलेक्टर भावना बालिम्वे को सौंपा गया।

संगठन की जिलाध्यक्ष मीराबाई मुन्नालाल यादव,प्रदेशाध्यक्ष सरिता ओमप्रकाश बघेल,ब्लॉक अध्यक्ष रजनीबाई नामदेव कमल सिंह,ब्लॉक सचिव भूरी बाई सरदार सिंह चौहान के नेतृत्व में भारी संख्या में महिलाओं ने नारेबाजी के बीच रैली में हिस्सा लिया।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमारी जायज मांगों की किसर ने अनदेखी की तो स्कूलों का एमडीएम और आंगनबाडिय़ों का सांझा चूल्हा बंद हो जाएगा।

कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने वालों में कलाबाई,भुरिया बाई,हीराबाई,गीता बाई,जीराबाई,कमलाबाई,पार्वती बाई,अनीता बाई,सुनीता,प्रर्मिला देवी,मीराबाई,गुड्डी बाई,नारायणी बाई,पुष्पा बाई,ममता बाई,कलावती ,भंवरी बाई, नीता देवी,रेखाबई, कांति बाई सविता ,शोभना,निधि ,शोभा ,आशा देवी,ऊषा बाई,ममता बाई,राधा बाई आदि शामिल रहीं।

ये प्रमुख मांगें हैं ज्ञापन में .....

रसोईया का मानदेय हजार रूपए से बढ़ाकर पांच हजार किया जाए।शासन द्वारा मिड-डे मील की राशि 80 प्रतिशत पहले की तरह दी जाए। जो कि वर्तमान में कटौत्रा कर 50 प्रतिशत ही दी जा रही है।शासन द्वारा मध्यान्ह भोजन की व्यय राशि 2008 की मान से भुगतान की जा रही है।प्राइमरी स्कूल में 4.69 स्पए, मिडिल स्कूल में 6.18 रूपए दिए जा रहे हैं। प्राइमरी स्कूल में खाद्यान्न 100 ग्राम प्रति छात्र से बढ़ाकर 200 ग्राम और मिडिल स्कूल में 150 ग्राम से बढ़ाकर 400 ग्राम दिया जाए।

साझा चूल्हा में संचालित स्व-सहायता समूहों, आंगनबाडिय़ों के रसोईया का मानदेय 500 से बढ़ाकर 3 हजार किया जाए। स्कूल और आंगनबाडिय़ों में धनराशि समूह संचालकों से बैंक खातों से आहरण करना पड़ती है। इसके लिए विभागीय अमले को मुंहमांगा कमीशन नजराने के रूप में भुगतान करना पड़ रहा है। इस नजराने की प्रथा को समाप्त किया जाए।समूहों को मिड-डे मील बनाने के लिए किचन शेड का निर्माण कराएं और गैस सिलेंडर चूल्हे आदि दिए जाएं।

बिजली बिल वितरण का कार्य स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दिया जाए। महिला स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों के बीमा कराए जाएं। साथ ही रोजगार से जोडऩे शासन लोन की व्यवस्था कराए।मध्यान्ह भोजन के सांझा चूल्हे के समूहों को विकास खंड स्तर पर पोषण आहार सप्लाईके ठेके दिए जाएं। शासन द्वारा वर्ष 2014 के आदेश के अनुसार सभी 51 जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ईंधन राशि और रसोईया का मानदेय दिया जाए।जोकि रसोईयाओं को कही दिया जा रहा कहीं नहीं।