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शहर में घूम रहा है बाघ, दानिश हिल्स से लेकर मैनिट तक दहशत

मैनिट कैंपस में नौ दिन से दहशत कायम, पिंजरे तक आया बाघ, अंदर नहीं गया, रातापानी से एक्सपर्ट पहुंचे

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भोपाल

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Manish Geete

Oct 13, 2022

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Wild Life: The cycle of terror will continue till March

भोपाल। कलियासोत की दानिश पहाड़ी, वाल्मी इंस्टीट्यूट से लेकर मैनिट परिसर तक लोग दहशत में हैं। गुरुवार को भी सुबह से फारेस्ट की टीमें इन इलाकों में बाघ की सर्चिंग करती रही। हाल ही में वाल्मी इंस्टीट्यूट पर बाघ देखा गया था। इसके बाद इसने मैनिट का रुख कर लिया। अब ताजा मामला दानिश पहाड़ी पर भी बाघ दिखा है। इसने सुबह जब दहाड़ लगाई तो मार्निंग वॉक पर निकले लोग भाग गए।

मैनिट परिसर में बाघ ने दो दिन बाद बुधवार को फिर अपनी मौजूदगी दिखाई। सोमवार- मंगलवार की शांति के बाद बुधवार को फिर बाघ चहलकदमी करने मैनिट के तालाब के आसपास निकला। उसने यहां सूअर का शिकार भी किया। यहां लगे पिंजरे के पास भी पहुंचा, लेकिन पिंजरे के अंदर के बकरे तक नहीं गया। तीन अक्टूबर से लगातार नौ दिन हो गए, जब बाघ मैनिट परिसर में ही है। अब इसे बाहर निकालने के लिए रातापानी से एक्सपर्ट्स को भी बुलवाया गया।

एक्सपर्ट्स शशांक देशमुख, सुरजीतसिंह, अमित ओढ़ ने वन विभाग के अफसरों के साथ यहां निरीक्षण किया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाघ पिंजरे में जरूर आएगा। यदि पिंजरे में आया तो उसे यहां से 200 किमी तक दूर यानी पचमढ़ी या इसके आसपास के जंगल में छोड़ा जाएगा। यदि मैनिट से पकड़कर इसे यहीं पास के वनक्षेत्र में छोड़ा गया तो फिर से इसके यहां आने की आशंका बनी रहेगी।

मैनिट परिसर में पानी और खाने के पर्याप्त इंतजाम होने से वह वहां बना हुआ है। मंगलवार रात को जब निकला तो एक छोटे ***** का शिकार किया। बाघ की लगातार मौजूदगी के बीच हॉस्टल खाली करवा लिए गए हैं। 30 अक्टूबर तक सबको छुट्टी दे दी गई है।

जंगल तक पहुंच गए इंसान तो बाघ कहां जाएं

राजधानी में केरवा से लेकर कलियासोत तक काफी जंगल है और पहाड़ हैं। ऐसे में शहरी आबादी बढ़ते हुए जंगल तक पहुंचने लगी। यहां बड़े रसूखदारों ने भी अपने फार्महाउस और होटल बना लिए, इस कारण भी बाघ अब शहरी आबादी की तरफ बढ़ रहा है। राजधानी भोपाल में 50 सालों पहले तक रातापानी से लेकर मैनिट पहाड़ी तक टाइगर मूवमेंट था। यहां तक कि अरेरा कालोनी, लिंक रोड तक घना जंगल था और लोग टाइगर के डर से इस क्षेत्र में नहीं आते थे। धीरे-धीरे शहर का विस्तार होता गया और जंगल कम होते गए। अब इंसान जंगल के घर में रहने पहुंच गए हैं।

जानकारों का कहना है कि बाघ शहर की तरफ नहीं आ रहा है, बल्कि इंसान धीरे-धीरे जंगल में अपने फार्म हाउस और होटल बनाते जा रहा है। ऐसे में हम बाघ के घर में पहुंच गए हैं तो वो कहा जाएगा। वो शहर की तरफ ही तो आएगा। ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि जंगलों में अपनी संपत्ति बनाने वालों पर लगाम लगाया जाना चाहिए। ऐसे रसूखदारों को अनुमति देना ही नहीं चाहिए।

यह पहला मौका नहीं है जब बाघ आबादी वाली इलाके में आ गया है। वो खाने और पानी की तलाश तक पहुंच जाता है। इससे पहले भी कई बार बाघ शाहपुरा इलाके में, कोलार इलाके में, भदभदा डैम तक पहुंच चुका है। इसके अलावा रायसेन तरफ से भी बाघ बैरसिया रोड स्थित नवीबाग स्थित कृषि संस्थान में पहुंच गया था। इसके बाद उसे रेस्क्यू करके वापस जंगल में छोड़ा गया था।

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