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मनोकामना भी पूरी करते हैं पेंच टाइगर रिजर्व के “बाघ’’, अब टूरिस्ट मांग सकेंगे मन्नत

Baghdev of Pench Tiger Reserve - मध्यप्रदेश का पेंच टाइगर रिजर्व देश दुनिया में अपने बाघों के लिए जाना जाता है।

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Tourists can now pray to Baghdev of Pench Tiger Reserve

Baghdev of Pench Tiger Reserve

Baghdev of Pench Tiger Reserve - मध्यप्रदेश का पेंच टाइगर रिजर्व देश दुनिया में अपने बाघों के लिए जाना जाता है। यहां बाघ संरक्षण की दिशा में खासा काम किया गया है। आसपास के आदिवा​सी समुदायों का बाघों से भावनात्मक जुड़ाव है। पेंच टाइगर रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों में बाघों को “बाघदेव’’ कहा जाता है और उन्हें देवता के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं, उनसे मन्नत भी मांगी जाती हैं। सदियों पुरानी यह परम्परा आज भी प्रचलित है। अब पेंच टाइगर रिजर्व में आनेवाले टूरिस्ट भी इस परंपरा का लाभ ले सकेंगे। पेंच प्रबंधन में इसके लिए एक योजना बनाई है जिसके अंतर्गत टूरिस्ट अपना नाम लिखकर “बाघदेव’’ के समक्ष अपनी मनोकामना व्यक्त कर उसे पूरी करने की मन्नत मांग सकेंगे।

सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में इसके लिए एक नया अभियान “बाघदेव’’ प्रारंभ किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस यानि 22 मई से शुरु हुआ यह अभियान बाघ दिवस यानि 29 जुलाई तक की अवधि के लिए है।

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पेंच टाइगर रिजर्व के उप संचालक रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि इलाके के ग्रामीण मिट्टी के बाघ बनाकर उससे प्रकृति के तत्वों को वरदान के रूप में लेते हैं। “बाघदेव’’ अभियान में मिट्टी के बाघ बनाए जाएंगे। बफर क्षेत्र की सभी 130 ईको विकास समितियों में बाघ निर्माण का काम कराया जाएगा।

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ईको विकास समितियों के सदस्य और पंचधार गांव के मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाने वाले विशेषज्ञ कुम्हार इस काम में सहायता करेंगे। पेंच प्रबंधन द्वारा समिति सदस्यों को पोस्टर के माध्यम से जागरूक किया जाएगा।

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पार्क प्रबंधन द्वारा मिट्टी के बाघों को एकत्रित करा भट्टी में पकाया जाएगा। इसके बाद बाघों को नए आस्था स्थल में संजोया जाएगा। खबासा में निर्माणाधीन स्टील स्क्रेप से बन रही बाघ कलाकृति के पास इन्हें स्थापित किया जाएगा। पेंच प्रबंधन का प्रयास है कि इस साल टेराकोटा (मिट्टी) की कलाकृति बनायी जाए।

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हाथों से बाघ बनाकर नाम लिखकर “बाघदेव’’ से मनोकामना मांग सकेंगे

उप संचालक रजनीश कुमार सिंह के अनुसार अभियान में ईको विकास समितियों के साथ पर्यटक भी जुड़ सकते हैं। टूरिस्ट अपने हाथों से बाघ बनाकर उसमें अपना नाम लिखकर “बाघदेव’’ से मनोकामना मांग सकेंगे। टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के बाहर के लोग भी इस काम में सहायता कर सकते हैं। इससे बाघ संरक्षण में समुदायों के भावनात्मक जुड़ाव के साथ ही पंचधार के मूर्तिकारों को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।