15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमपी में कुंभ में डुबकी लगाएंगे 14 करोड़ लोग, 598 करोड़ में पानी शुद्ध करेगी सरकार

Ujjain Kumbh Shipra River Kanh Diversion Close Dot Project कुंभ में इस बार करीब 14 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है। ये सभी लोग शिप्रा में शुद्ध पानी में डुबकी लगा सकें, इसके लिए सरकार ने शिप्रा शुद्धिकरण की योजना बनाई है।

2 min read
Google source verification
Ujjain Kumbh Shipra River Kanh Diversion Close Dot Project

Ujjain Kumbh Shipra River Kanh Diversion Close Dot Project

Ujjain Kumbh Shipra River Kanh Diversion Close Dot Project एमपी में उज्जैन में लगनेवाले कुंभ के लिए राज्य सरकार जबर्दस्त तैयारी कर रही है। कुंभ में इस बार करीब 14 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है। ये सभी लोग शिप्रा में शुद्ध पानी में डुबकी लगा सकें, इसके लिए सरकार ने शिप्रा शुद्धिकरण की योजना बनाई है। 598 करोड़ की इस योजना का सीएम मोहन यादव 16 जून को भूमि पूजन करेंगे।

शिप्रा शुद्धिकरण के लिए शिप्रा नदी Shipra River में इंदौर से कान्ह नदी से आनेवाले प्रदूषित पानी को रोका जाएगा। इसके लिए कान्ह डायवर्सन क्लोज डॉट परियोजना बनाई गई है। सीएम डॉ मोहन यादव ने इस परियोजना को स्वीकृति दे दी है।

यह भी पढ़ें : एमपी में राह चलते पड़े मिल रहे हीरे, 5 हजार लोगों ने खोद डाला पहाड़

उज्जैन में सन 2028 में कुंभ का आयोजन होगा जिसके कारण शिप्रा शुद्धिकरण का मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है। सीएम डॉ मोहन यादव भी हर हाल में कुंभ के दौरान शिप्रा में शुद्ध पानी मुहैया कराने चाहते हैं। इसी कारण इंदौर से आने वाली कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोकने की योजना बनाई गई है ताकि शिप्रा का जल शुद्ध बना रहे।

कान्हा डायवर्सन क्लोज डॉट परियोजना की लागत 598.66 करोड़ रुपए है। इस परियोजना में 100 मीटर लंबा एप्रोच चैनल, 29 किमी लंबा 4.5 मीटर का भूमिगत बॉक्स तथा अंत में 100 मीटर का ओपन चैनल बनाया जाएगा।

उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार इंदौर तथा सांवेर का सीवेज का पानी कान्ह नदी में मिलता है। कान्ह का यही गंदा पानी आगे जाकर शिप्रा में मिलता है। इस रोकने के लिए जमालपुर में कान्ह नदी पर बैराज बनाया जाएगा। क्लोज डॉट से पानी को गंभीर बांध के डाउन स्ट्रीम में डायवर्ट कर दिया जाएगा। यह योजना 42 महीने में पूरी हो जाएगी। इस तरह सिंहस्थ 2028 के पहले शिप्रा का पानी पूरी तरह शुद्ध हो जाएगा।