29 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Valentine’s Day: इश्क बिना क्या जीना…..आपके दिल को छू लेगी पुलिस अधिकारी और प्रोफेसर की प्रेम कहानी

भोपाल। प्यार......एक ऐसा एहसास जो हर किसी के जीवन में आता है। कुछ लोगों को यह आसानी से मिल जाता है, तो कुछ को इसे पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। प्रेमियों (Valentine's Day) को जिस दिन का इंतजार था वो खास दिन आ गया।

2 min read
Google source verification
2.jpg

Valentine's Day

आज शहर के कपल्स वेलेंटाइन डे (Valentine's Day) सेलिब्रेट कर रहे हैं। सब जानते हैं कि प्यार एक अनोखा एहसास है लेकिन जिनका प्यार अपने मुकम्मल अंजाम तक पहुंचने से पहले कई सारे खतरों और नाटकीय मोड़ो से गुजरा हो उनके लिए इसका एहसास कुछ ज्यादा ही खास होता है। वह जोड़े जिनको उनका प्यार काफी संघर्षों के बाद मिला हो वह प्यार के त्योहार यानी वेलेंटाइन डे को सेलिब्रेट करने से कभी नही चूकते। आज उसी पर्व का दिन है और पत्रिका ने ऐसे ही कुछ लोगों से बात कर जानी उनकी कहानी।

न्याय दिलाने के विचार मिले तो बन गई हमारी जोड़ी

मध्य प्रदेश पुलिस सेवा के अधिकारी एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान एवं उनकी धर्मपत्नी राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की एचओडी डॉ ज्योत्सना चौहान की प्रेम कहानी कुछ अलग है। एक रिश्तेदारी के कार्यक्रम में हुई मुलाकात के दौरान दोनों ने वर्ष 2001 में पहली बार एक दूसरे को देखा था। बातचीत शुरू हुई और दोनों ने एक दूसरे के विचारों को जानने समझने का सिलसिला शुरू किया।

पुलिस सेवा में आने के बाद लोगों को न्याय दिलाने और शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रही डॉक्टर ज्योत्सना चौहान की समाज को शिक्षित करने जैसी बातों ने एक दूसरे को प्रभावित किया। बात घर तक पहुंची। परिजनों ने एक दूसरे की इच्छा का पता चलते ही रिश्ता पक्का कर दिया। आज वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह चौहान एवं डॉ ज्योत्सना चौहान हंसी-खुशी परिवार सहित समाज में अपना योगदान दे रहे हैं। उनका कहना है न्याय दिलाने के विचार की एकरूपता प्रेम की वजह बनी।

14 साल बाद दिल का करार

आज से करीब 25 साल पहले की बात है। बोर्डिंग स्कूल में प्रार्थना के लिए बच्चे ग्राउंड पर एकत्र हो रहे हैं। इसी दौरान लास्ट बैंच से उठ कर सबसे लास्ट में ग्राउंड पर आने की आदत वाले अविनाश ने पहली बार खुद से दो साल सीनियर प्रीति को देखा। प्रीति टॉपर स्कूल टॉपर है। यहीं से एक लव स्टोरी की शुरूआत हुई। स्कूल से मेडिकल की तैयारी तक में अविनाश ने प्रीति का पीछा नहीं छोड़ा। दोनों ने साथ में मेडिकल की तैयारी भी की। इसके बाद साल 2002 में प्रीति का गांधी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन हो गया। लेकिन अविनाश ने भी एक साल बाद ही इसी कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिला पा लिया। कॉलेज में पढ़ाई के साथ ह्रश्वयार भी गहरा होता चला गया। दोनों की परिवार की सहमति के बाद साल 2012 में शादी हुई।