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सस्ती पढ़ाई के साथ ये भी सबसे बड़ा आकर्षण, जानिए विदेश ज्यादा क्यों जा रहे हमारे युवा

दो साल पहले जैसे ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरु हुआ देश और मध्यप्रदेश में भी तनाव और चिंता का माहौल बन गया था। दरअसल एमपी सहित देश के हजारों स्टूडेंट यूक्रेन में फंस गए थे जिन्हें बमुश्किल सुरक्षित निकाला जा सका। रूस- यूक्रेन की जंग छिडऩे के बाद हालात कुछ बदले हैं पर अभी भी पढ़ाई के लिए एमपी से हजारों छात्र विदेश जा रहे हैं। इनमें अधिकांश छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं।

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पढ़ाई के लिए एमपी से हजारों छात्र विदेश जा रहे

भोपाल. दो साल पहले जैसे ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरु हुआ देश और मध्यप्रदेश में भी तनाव और चिंता का माहौल बन गया था। दरअसल एमपी सहित देश के हजारों स्टूडेंट यूक्रेन में फंस गए थे जिन्हें बमुश्किल सुरक्षित निकाला जा सका। रूस- यूक्रेन की जंग छिडऩे के बाद हालात कुछ बदले हैं पर अभी भी पढ़ाई के लिए एमपी से हजारों छात्र विदेश जा रहे हैं। इनमें अधिकांश छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं।

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दुनिया की टॉप क्लास मेडिकल यूनिवर्सिटी अमेेरिका और ब्रिटेन में है लेकिन MBBS की पढ़ाई करने के लिए इन दोनों देशों की बजाए प्रदेश से सबसे बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स चीन, यूक्रेन या रूस जाते हैं। एक्सपर्ट बताते हैं कि दरअसल इन देशों में MBBS के लिए एडमिशन बहुत आसानी से मिल जाता है। यूक्रेन में NEET क्लियर कर लेने पर ही MBBS में एडमिशन मिल जाता था फिर भले ही छात्र की रैंक कुछ भी हो।

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रूस और चीन में आज भी आसानी से एडमिशन मिल जाता है। छात्रों की इन देशों में जाने की सबसे बड़ी वजह यही है। मेडिकल की सीट प्राप्त करने के लिए न तो हमारे यहां जैसी मारामारी होती है और न ही अमेरिका और ब्रिटेन की तरह यहां केवल ब्रिलिएंट स्टूडेंट ही जा पाते हैं। देश में भी केवल टैलेंटेड स्टूडेंट्स को ही एडमिशन मिल पाता है जबकि रूस, यूक्रेन या चीन में सभी छात्रों को आसानी से एडमिशन मिल जाता है। यहां जाने का यह सबसे खास आकर्षण है।

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हालांकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन देशों में MBBS की फीस बहुत कम है। मेडिकल कोर्स के लिए भारत या अन्य देशों की तुलना में रूस, चीन या यूक्रेन में फीस बहुत कम है। देश में सामान्यत: इसमें कम से कम 60 लाख रुपए खर्च होते हैं जबकि यूक्रेन में महज 30 लाख रुपए में ही यह काम हो जाता है। भारत से हवाई जहाज से रूस, यूक्रेन या चीन आने जाने में भी महज 6 घंटे लगते हैं और फ्लाइट का किराया भी बहुत ज्यादा नहीं है। इस तरह भारत की तुलना में करीब 50% कम खर्च में यहां MBBS पूरा हो जाता है।

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गौरतलब है कि इंटर्नशिप करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया विदेश में रहकर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों का एंट्रेस एग्जाम लेता है। यूक्रेन-रूस में छिड़ी जंग के चलते मध्यप्रदेश के एक हजार से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए थे। यूक्रेन से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले प्रदेश छात्रों ने हाल ही में मुंबई में एमबीबीएस फाइनल ईयर की परीक्षा देकर डिग्री पूरी की है। अब ऐसे छात्रों को इंटर्नशिप करने के लिए 20 जनवरी को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एंट्रेंस एग्जाम (Foreign Medical Graduates Examination) देना होगा।

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