
World Heart Day: कम उम्र के लोगों को भी आ रहा हार्ट अटैक, 11 साल के बालक का वॉल्व रिप्लेसमेंट(photo-patrika)
World Heart Day 2024: राजधानी में हार्ट के मरीजों की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक दिल की बीमारी से परेशान हैं। भोपाल के हार्ट विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज से ज्यादा बीमारी से सुरक्षित रहने पर ध्यान देने की जरूरत है। जीवन शैली में बदलाव और घर में उपयोग होने वाले तेल को बदल कर हार्ट संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है।
- सरसों का तेल, ऑलिव ऑयल, राइस ब्रेन ऑयल और देशी घी गुड कोलेस्ट्रॉल बनाते हैं।
- पॉम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, नारियल तेल पॉली सैचुरेटेड ऑयल हैं उनके उपयोग से बचें।
- मैदा और चीनी से दूर रहें।
मोबाइल पर घंटों काम करने से दिल के रोग होने का खतरा बढ़ता है। लंबे समय तक फोन का उपयोग करने पर फिजिकल एक्टिवटी नहीं हो पाती। जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल, वजन बढऩा, समय की बर्बादी से एंग्जायटी व स्ट्रेल समेत अन्य परेशानियां बढ़ती हैं। यह यब दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाने का कार्य करती हैं। मानसिक तनाव और बचपन के बुरे व भयावह अनुभव भी अचानक आने वाले हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं।
-डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव, मेडिसिन एक्सपर्ट
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) की स्क्रीनिंग में राजधानी समेत प्रदेश में हाई बीपी के 18 लाख और मधुमेह के 10.67 लाख मरीज सामने आए हैं। शोध बताते हैं कि मधुमेह से पुरुषों में स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर का जोखिम 44 फीसदी और महिलाओं में यह 31 फीसदी होता है। इसलिए इनसे बचने की जरूरत है।
-डॉ. कुलदीप गुप्ता, क्युनिटी मेडिसिन एक्सपर्ट
अब मधुमेह, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल आम बीमारी है। इनके बढऩे पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लें। धूम्रपान से दूर रहें। युवाओं में दिल की बीमारी के लिए यह प्रमुख कारण है। सह्रश्वताह में कम से कम पांच दिन योग और एक्सरसाइज जरूर करें। याद रखें गैस का दर्द और लो बीपी जैसी कोई चीज नहीं होती। नियमित दिनचर्या और एक्सरसाइज से यह बीमारी नहीं होती।
-डॉ. भूषण शाह, कार्डियोलॉजिस्ट, एम्स
युवाओं में अचानक हार्ट अटैक की बड़ी वजह थ्रिफ्टी जीन है। यह आनुवंशिक विशेषता है जो पूर्वजों को अकाल मृत्यु से बचाती थी। जब भोजन की कमी थी, तब यह जीन शरीर को अधिक वसा इकट्ठा करने में मदद करता था। अब यह विपरीत प्रभाव डाल रहा है। जीन एक्स्ट्रा फैट जमा कर रहा है। जिससे डायबिटीज और हार्ट अटैक हो रहा है।
-डॉ.दीपक चतुर्वेदी, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ
Updated on:
29 Sep 2024, 10:43 AM IST
Published on:
29 Sep 2024, 10:43 AM IST
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