यह उत्सव कटक नगर में महानदी के तट गड़गड़िया घाट पर मनाया जाता है। प्राचीनकाल में ओडिशा के नाविक बाली, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो और श्रीलंका आदि सुदूर प्रदेशों की यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। बालीयात्रा का शाब्दिक अर्थ बाली की यात्रा। इन यात्राओं का उद्देश्य व्यापार तथा सांस्कृतिक प्रसार होता था। जिन नावों से यात्रा व्यापारी करते थे वो आकार में विशाल होती थीं। इन्हें बोइत कहा जाता था। इसी की स्मृति में यह उत्सव मनाया जाता है। यह यात्रा कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होती है। बाली यात्रा उत्कल के नौवाणिज्य का स्वर्णिम स्मारक है।