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कार्तिक पूर्णिमा से शुरू हो रहा ओडिशा का महोत्सव ‘बाली यात्रा’, सजने लगी झांकियां

यह ओडिशा का प्रमुख उत्सव है...

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bali yatra

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(कटक,भुवनेश्वर): ओडिशा की ऐतिहासिक बालीयात्रा को अविस्मरणीय पल बनाने के लिए जिला प्रशासन हर संभव तैयारी में जुटा है। कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होने वाला यह ऐतिहासिक पर्व अबकी प्रदूषण मुक्त रखने का संकल्प लिया गया है। महानदी तट पर मेरी टाइम म्यूजियम दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, जहां जाकर लोग बाली यात्रा की यादें ताजा करते हैं।


जिलाधिकारी अरविंद अग्रवाल ने कहा कि अबकी बालीयात्रा मेला स्थल पर धूल के गुबार नहीं दिखेंगे। इसके लिए कुछ रसायन का छिड़काव किया जाएगा, जो धूल को उड़ने नहीं देगा। जिला प्रशासन ने बताया कि 44 एकड़ विशाल मैदान में लगने वाला यह बालीयात्रा मेला स्थल कटक में 13 सौ स्टाल आवंटित किए गए हैं।


चाक—चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

इसके अलावा 350 कियॉस्क आवंटित किए जा चुके हैं। विभिन्न प्रांतों से स्टाल लगाने वाले अपने-अपने स्टाल को फाइनल टच दे रहे हैं। डीसीपी अखिलेश्वर सिंह ने बताया कि 32 प्लाटून पुलिस तैनात की गई है। इसके अलावा फायर सर्विस की व्यवस्था की गई है। फोर्स भीड़ नियंत्रण व सुरक्षा इंतजाम करेगी। चप्पे चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यह ओडिशा का प्रमुख उत्सव है।

इसलिए मनाया जाता है बाली महोत्सव

यह उत्सव कटक नगर में महानदी के तट गड़गड़िया घाट पर मनाया जाता है। प्राचीनकाल में ओडिशा के नाविक बाली, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो और श्रीलंका आदि सुदूर प्रदेशों की यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। बालीयात्रा का शाब्दिक अर्थ बाली की यात्रा। इन यात्राओं का उद्देश्य व्यापार तथा सांस्कृतिक प्रसार होता था। जिन नावों से यात्रा व्यापारी करते थे वो आकार में विशाल होती थीं। इन्हें बोइत कहा जाता था। इसी की स्मृति में यह उत्सव मनाया जाता है। यह यात्रा कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होती है। बाली यात्रा उत्कल के नौवाणिज्य का स्वर्णिम स्मारक है।