
माओवादी
(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): अपहुंच इलाकों को शेष ओडिशा से जोड़ने में बेहद महतवपूर्ण बन चुका गुरुप्रिया पुल पूरा होने के श्रेय लेने को राजनीतिक दल जहां एक ओर बयानबाजी करने लगे हैं वहीं माओवादियों ने इसके विरोध में ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।
एकत्र हुए 600 माओ समर्थक
माओवादियों के नेता रबाना के नेतृत्व में तकरीबन 600 आदिवासी लोग एकत्र हुए। ओडिशा आंध्र के सीमावर्ती क्षेत्र में पहले सभा हुई जिसमें राज्य और केंद्र के माओ आंदोलन को रौंदने के मंसूबे बताए गए। रबाना का कहना है कि गुरुप्रिया पुल इसी की देन है। ये सभी 600 माओ समर्थक रालेगड़ा और कर्कुंडा से माओवादियों की सभा में भाग लेने आए थे। उधर माओवादियों के शहीदी सप्ताह के दूसरे दिन दो कुख्यात माओवादियों ने मलकानगिरि पुलिस अधीक्षक जगमोहन मीणा के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इन दोनों पर कई मुकदमें दर्ज हैं।
पुल पर राजनीति शुरू
गुरुप्रिया पुल निर्माण पूरा होने के बाद राजनीतिक दलों मे श्रेय लेने की होड़ मच गई है। कटआफ एरिया को जोड़ने वाले इस पुल पर सीएम नवीन पटनायक के ट्वीट के बाद 13,800 ट्वीट किए गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने कहा कि इसकी शुरुआत कांग्रेस ने की थी। पूर्व मुख्यमंत्री जानकीबल्लभ पटनायक ने इसकी आधार शिला रखी थी। सत्ता परिवर्तन के कारण बीजद सरकार ने श्रेय ले लिया। इस पर बीजद प्रवक्ता सुलोचना दास कहती हैं कि 1982 से लेकर अब तक कांग्रेस कितने साल सत्ता में रही है सब जानते हैं फिर पुल पूरा करा लिया होता। विकास करना एक बात है और विकास पर राजनीति करना दूसरी बात है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सवाल है कि जिस पुल आठवे दशक तक पूरा होना चाहिए था उसका अब क्यों उद्घाटन किया जा रहा है।
Published on:
29 Jul 2018 03:37 pm
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