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(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): गुरुप्रिया पुल के विरोध में माओवादियों की जंग जारी है। बीती 29 जुलाई को माओ समर्थकों के विरोध के बाद शनिवार को बासुगुडा वन क्षेत्र में पुल के विरोध में प्रदर्शन किया गया। इसमें करीब 600 लोगों की भागीदारी रही। माओवादी लीडरों का कहना है कि यह पुल चित्रकोंडा, कलिमेला ब्लाकों के हजारों की संख्या में आदिवासी आबादी का सुख चैन छीन लेगा। प्राकृतिक संसाधन का इस कदर दोहन होगा कि आदिवासी के सामने रोजगार का संकट उत्पन्न हो जाएगा। इस अवसर पर एनकाउंटर में मारे गए माओवादियों का स्मारक स्थल भी बनाया गया।
ताज्जुब तो यह है कि जबर्दस्त सिक्योरिटी के बाद भी माओवादी गुरुप्रिया के विरोध में कैंप आयोजित कर रहे हैं। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में विरोध कैंप लगाकर माओवादियों ने राज्य सरकार को चुनौती दी है कि चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बाद भी उनकी सक्रियता पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ा। इन वन क्षेत्र में लगाए गए कैंप में 12 से ज्यादा गांवों के लोगों ने भाग लिया। कॉमरेड सुधीर की पहल पर लगे कैंप में गांव वालों को संबोधित किया
गया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुप्रिया का लोकार्पण करके आदिवासियों के हित में अच्छा नहीं किया। वह बे-वजह खून बहाना चाहते हैं। वक्ताओं ने सरकार के खिलाफ माओवादियों के आंदोलन को और भी संगठित करने की अपील की। इस मौके पर मारे गए माओवादियों की स्मृति में स्मारक बनाया गया।
बता दें कि माओ प्रभावित क्षेत्रों को मुख्य धारा के ओडिशा से जोड़ने के लिए माओवादियों के घोर विरोध के बीच भी राज्य सरकार की ओर से मलकानगिरि में गुरूप्रिया पुल का निमार्ण किया गया। माओवादियों की ओर से शुरू से ही इस पुल का विरोध किया जाता रहा। कई बार पुल पर ब्लास्ट भी किए गए जिसके कारण पुल बनने में देरी हुई। सभी विपरित परिस्थितियों का सामना करते हुए पुल का निमार्ण पूरा किया गया और खुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस पुल का उद्घाटन किया।
Published on:
05 Aug 2018 07:25 pm
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