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सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में जुटी भक्तों की भीड़

सबसे ज्यादा भीड़ भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर पर देखी गई, जहां सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई...
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kanwariya

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(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): हजारों की संख्या में कावंड़ियों सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सावन के दूसरे सोमवार को भगवान शंकर का जलाभिषेक किया। नक्षत्रों के अद्भुत संयोग के चलते सावन का दूसरा सोमवार भक्तों को लाभ देने वाला माना जा रहा है। कंधे पर कांवड़ लिए कई-कई किलोमीटर से पैदल आने वाले ये कांवड़िये बोल बम का उद्घोष करते हुए नदियों का जल लेकर शिवालय पहुंचे।

सबसे ज्यादा भीड़ भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर पर देखी गई, जहां सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई। सिर से पांव तक भगवावस्त्र धारण किए कांवड़ियों ने भोर से ही लंबी लाइनें लगाकर दर्शन किए। आम भक्तों की भी खासी भीड़ देखी गई। भक्तों की सुविधा के लिए शिवालय के द्वार तड़के ही 3.30 बजे ही खोल दिए गए। सहाना मेला, जललागी की परंपरा निर्वहन की गई। महानदी के गड़गड़िया घाट पर हजारों की संख्या में एकत्र हुए कांवड़ियों ने जल लेकर लिंगराज मंदिर की ओर कूच किया।


कावंड़ियों के लिए विशेष लाइन लगवाई गई। यहां पर ओडिशा के विभिन्न हिस्सों से कांवड़ियें चलकर आते हैं। हजारों की भीड़ पहुंचने के संभावनाओं के चलते भारी संख्या में पुलिस बल, 25 सीसीटीवी कैमरे आदि की व्यवस्था कर दी गई। इसी प्रकार लोकनाथ मंदिर पुरी में भी भारी भीड़ देखी गई। वहां लगभग 30 हजार कांवड़ियों के पहुंचने के कारण अफरातफरी का माहौल रहा। इसके अलावा धवलेश्वर मंदिर कटक, पंचलिंगेश्वर मंदिर बालासोर, कपिलास मंदिर ढेंकानाल, अखंडलमणि भद्रक में भी बहुत भक्तों की भीड़ देखी गई।

बता दें कि सावन माह को भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे विशेष माना जाता है। मान्यता है कि सावन में शिव भक्तों से जल्दी प्रसन्न होते है। पौराणिक मान्यताओं के सावन माह में ही समुद्र मंथन हुआ। इसी के साथ सावन के सोमवार की भी अपनी अलग महिमा है और दूसरे सोमवार इनमे सबसे विशिष्ट है। सावन की दूसरे सोमवारी को ऐरावत हाथी की उत्पत्ति हुई थी। जो शक्ति ऐश्वर्य और वैभव का प्रतीक माना जाता है।

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