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एक चेहरा जो किसान आंदोलन में अलग से दिखता है, पर हर कदम पर दे रहा किसानों का साथ

कटक के बांकी ब्लाक की रहने वाली मेघना का नाता खेतीबाडी से भी रहा है पर उसका मानना है कि देश का पेट भरने वाले किसानों के दर्द की तरफ लोगों का ध्यान कम जाता है, अपनी बात कहने के लिए उन्हें लाठियां सहनी पड़ती हैं...

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meghna

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(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): किसानों से उसका दर्द का रिश्ता है। प्राइस, पेंशन व प्रेस्टिज के मुद्दे पर ओडिशा के किसानों के भुवनेश्वर कूच आंदोलन में कहीं न कहीं यह चेहरा दिख जाता है। लोग बरबस उसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं। यह चेहरा ट्रांसजेंडर है। नाम है किन्नर मेघना साहू। साहू आल ओडिशा किन्नर एसोसिएशन से जुड़ी हैं। कटक के बांकी ब्लाक की रहने वाली मेघना का नाता खेतीबाडी से भी रहा है। पर उसका मानना है कि देश का पेट भरने वाले किसानों के दर्द की तरफ लोगों का ध्यान कम जाता है। अपनी बात कहने के लिए उन्हें लाठियां सहनी पड़ती हैं।


जगह—जगह रोकी जा रही किसानों की रैली

नव निर्माण किसान संगठन के बैनर तले किसान यात्रा तटीय जिलों से निकाली गई है। यात्रा को अनुमति न मिलने के कारण इसे जगह—जगह रोका जा रहा है। मेघना कहती है कि प्राइस पेंशन और प्रेस्टिज की मांग कर रहे किसानों से सरकार बात करके हल निकाले। उनका दमन नहीं करना चाहिए। मेघना साहू किसानों के साथ कदमताल करते हुए उनकी आवाज से आवाज मिलाकर नारे लगाती है। वह कहती है कि हालांकि बीती रात वित्तमंत्री शशिभूषण बेहरा ने आंदोलनकारियों से बातचीत की है, कुछ हल निकल सकता है। सरकार इसकी घोषणा जल्द से जल्द करे।


दौड—दौड कर रही किसानों के साथ काम

मेघना इस समय भुवनेश्वर के तटवर्ती क्षेत्र रसूलगढ़ में किसानों के साथ है। किसानों के बीच वह दौड़-दौड़कर काम कर रही है। नव निर्माण किसान संगठन के नेता लोगों का कहना है कि मेघना भी किसान आंदोलन की कार्यकर्ता है। मेघना साहू कहती हैं कि किसान अपने फसलों के उचित दाम के लिए, अपने सम्मान के लिए और पेंशन के लिए यह यात्रा निकाल रहे हैं।


किसान क्यों नहीं पा सकते पेंशन?

मेघना साहू सवाल उठाती है कि इस देश में जब विधायक और सांसद पेंशन पा सकते हैं तो किसान क्यों नहीं? पर जब किसान अपनी बात पुरजोरी से उठाता है तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। सुरक्षा बलों को सामने लाकर उन्हें भयभीत किया जाता है। जगह-जगह लोगों ने कैंप लगाकर किसानों को सुविधाएं मुहैया कराईं। मेघना कहती है कि वह खोरदा जिले में सक्रिय रही। अपनी समस्याओं से जूझ रहे किसान आत्महत्या कर रहे हैं। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया गया था कि 2016 में ओडिशा में 121 किसानों ने आत्महत्या की थी।