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सलवा जुडूम के दौर की साजिश! राहत शिविर में अंगूठा लगवाकर हड़प ली ग्रामीणों की 127 एकड़ जमीन, जानें पूरा मामला…

Land Scam: फर्जी ईमेल के जरिए भुगतान स्वीकृति हासिल करने की कोशिश का खुलासा होने के बाद अब कंपनी ने भुगतान से पहले सत्यापन पोर्टल कन्फर्मेशन अनिवार्य कर दिया है।

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ग्रामीणों के 127 एकड़ भूमि में धोखाधड़ी (photo source- Patrika)

ग्रामीणों के 127 एकड़ भूमि में धोखाधड़ी (photo source- Patrika)

Land Scam: बस्तर में सलवा जुडूम आंदोलन के उथल-पुथल वाले समय में जब सैकड़ों गांव खाली हुए थे, तब भैरमगढ़ के गोदामपारा राहत शिविर में रह रहे चार परिवारों की लगभग 127 एकड़ पैतृक जमीन किसी और के नाम स्थानांतरित हो गई। अब सालों बाद गांव लौट रहे, ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कभी जमीन बेची ही नहीं, न ही किसी रजिस्ट्री कार्यालय में जाकर दस्तखत या अंगूठा लगाया।

Land Scam: ग्रामीणों का आरोप…

ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारियों ने शिविरों में आकर ‘‘राशन और मकान मिलेगा’’ कहकर दस्तावेजों पर अंगूठे लगवाए, और उन्हीं कागजों का सहारा लेकर जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई। यह जमीन सन 2011-12 में जगदलपुर के एक व्यापारी के कर्मचारी संजय व उसकी पत्नी कुनिका सरका के नाम चढ़ा दी गई।

सलवा जुडूम के समय बैल, धरमा, छोटेपल्ली और बड़ेपल्ली गांवों के कई परिवार नक्सली दहशत में अपना घर-खेत छोड़कर भैरमगढ़ शिविर में आकर रहने लगे थे। इन्हीं में से चार परिवारों की जमीन का स्थानांतरण हो गया। जिसमे घस्सू राम पिता लक्ष्मीधर जाति रावत, पिला राम पिता गेतू जाति रावत,चेतन नाग पिता संपत नाग जाति तेलंगा, लेदरी सेठिया जाति कलार, की लगभग 127 एकड़ भूमि इन्हीं हवाला सफेदपोशों ने धोखाधड़ी कर हड़प ली व उसका सौदा कर दिया।

15 लोगों को जारी किया नोटिस

Land Scam: सूर्यकांत घरत, तहसीलदार: तहसीलदार ने बताया कि जमीन खरीदी-बिक्री के इस मामले में अब तक 15 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, लेनदेन से जुड़े 4 व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है। क्रेताओं की ओर से अपने पक्ष में जवाब प्रस्तुत किया गया है और वे चेक के माध्यम से भुगतान किए जाने का दावा भी कर रहे हैं। पूरे प्रकरण की जांच जारी है।

ग्रामीणों ने पत्रिका को बताया

घस्सू राम, ग्रामीण: हम पढ़े-लिखे नहीं हैं। शिविर में पटवारी लोग आते थे। बोलते थे राशन मिलेगा, घर मिलेगा, यहां अंगूठा लगाओ। हमने तो भरोसे में लगा दिया। हम कभी रजिस्ट्री ऑफिस तक नहीं गए। हमें यह भी नहीं पता था कि कागज किस चीज़ के हैं?

पिला राम , ग्रामीण: हम तो गांव छोड़कर अपनी जान बचाने आए थे। किसे पता था कि हमारी पुश्तैनी खेत ही किसी और के नाम हो जाएंगे। हमें जांच चाहिए और हमारी जमीन वापस मिले।

कई सवाल उठ खड़े हो रहे

Land Scam: सलवा जुडुम व उसके बाद कई वर्ष तक बीजापुर, सुकमा के सैकड़ों आदिवासियों को कैँप में सुरक्षाबल क साये में रखा जाता था। इस दौरान वहां आम आदमी की आवाजाही बंद रहती थी। ऐसे में जमीन के कागजात हासिल कर उन्हें बेचने की कार्रवाई करने खरीदार कैंप कैसे पहुंचे? राजस्व अमला व पंजीयक ने कैसे अनुमति दे दी। इन सवालों का एक ही जवाब है कि बिना सरकारी प्रश्रय के यह धोखाधड़ी नामुमकिन है।