
533 साल का हुआ बीकानेर
बीकानेर.पनरै सौ पैतालवे सुद बैसाख सुमेर, थावर बीज थर्पयो बीके बीकानेर राव बीका के स्वप्न, गंगा बाबे की लाल फौज और जय जंगलधर बादशाह का शहर बीकानेर आज अपना 533 वां स्थापना दिवस मना रहा है। राव बीका ने संवत् 1545 में बैसाख मास की द्वितीय तिथि को बीकानेर की स्थापना की। बीकानेर स्थापना के 533 साल में आज पहली बार ऐसा हो रहा है, जब शहरवासी अपने घरों में नगर का स्थापना दिवस मना रहे है। कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को लेकर चल रहे लॉक डाउन के कारण लोग घरों में है।
सडक़ों, बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों तक में सन्नाटा है। कोरोना वायरस के संक्रमण का फैलाव न हो इसलिए इस बार पतंगबाजी और चंदा उड़ाने पर भी रोक है। नगर स्थापना दिवस पर जूनागढ़, लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित शहर में विभिन्न स्थानों पर अपने विशिष्ट आकार और नगर की कीर्ति और यशोगान के साक्षी बनने वाले चंदो की खुले आकाश में होने वाली अठखेलियों पर भी इस बार रोक लगी हुई है। पतंग-मांझों की दुकानें बंद और छत्तों पर बोई काट्या है, फेर उड़ा के गुंजायमान स्वर भी थमें हुए है। राव बीकाजी टेकरी, जूनागढ़ के समक्ष, लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित शहर में कई स्थानों पर पारम्परिक रूप से होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम भी इस बार कोरोना के कारण नहीं हो रहे है।
घरों में मना रहे उत्सव
बीकानेर का स्थापना दिवस इस बार शहरवासी अपने घरों में मना रहे है। परम्परानुसार मटकी का पूजन कर जहां घर, परिवार, शहर, प्रदेश और देश की खुशहाली की कामनाएं की जा रही है, वहीं घरों में पारम्परिक रूप से खीचड़ा इमलाणी का भोजन के रूप में उपयोग किया जाएगा।
Updated on:
25 Apr 2020 07:52 am
Published on:
25 Apr 2020 07:52 am
