
Divyang Anubhuti Park
लूणाराम वर्मा
बीकानेर जिले के महाजन क्षेत्र में राजमार्ग संख्या 62 पर मोखमपुरा की तरफ दिल्ली के एक चिकित्सक ने खजूर का बाग लगाया है। खजूर का खूब उत्पादन होने से उन्हें हर साल लाखों रुपए की आमदनी हो रही है। बारानी क्षेत्र में होने से किसान मोठ, ग्वार, बाजरा, तिल की ही बुवाई करते हैं। करीब सात साल पहले किसान ने खजूर के पौधे लगाए तो लोगों ने कामयाबी पर संदेह जाहिर किया था, लेकिन आज फलों से लदे पेड़ देखकर हर कोई आश्चर्य करता है।
इनका कहना है
इस मरूस्थलीय भूमि पर खजूर की पैदावार ली जा सकती है। किसानों को तीन साल तक मेहनत करनी पड़ती है। उसके बाद हर साल लाखों की पैदावार लेकर आमदनी बढ़ाई जा सकती है। सरकार अनुदान भी देती है।
अब्दुल अमीन, कृषि विशेषज्ञ
पक्षियों व बरसात से होने वाले नुकसान से बचाव के लिए फलों पर प्लास्टिक की थैलियां लगाई जाती हैं। खजूर की थोक बिक्री के लिए ट्रकों द्वारा दिल्ली, चण्डीगढ़, मुम्बई सहित अन्य जगहों पर भेजा जाता है। राजमार्गों तथा लोकल मार्केट में भी बिक्री होती है।
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बाग की देखरेख करने वाले कालूराम ने बताया, करीब आठ साल पहले दिल्ली के चिकित्सक बलवीरसिंह ने 30 बीघा में 1250 पौधे लगवाए थे। बाग में चार किस्मों के पेड़ लगे हुए हैं। इनमें विशेष तौर से मेडज़ूल, बरी, खूनेजी व खलास किस्में मुख्य हैं।
Published on:
07 Jul 2022 10:00 am
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