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पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में किया बीकानेर के अभय जैन ग्रंथालय का जिक्र, जानें यहां की कॉपर प्लेट पांडुलिपियों का महत्व

अभय जैन ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने बताया कि इस ग्रंथालय की स्थापना अगरचंद नाहटा ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से की थी। यह विशाल पांडुलिपि संग्रह वर्षों की साधना और समर्पण का परिणाम है।

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अभय जैन ग्रंथालय में संरक्षित कॉपर प्लेट पांडुलिपि ( फोटो-पत्रिका)

बीकानेर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बीकानेर स्थित अभय जैन ग्रंथालय में संरक्षित प्राचीन कॉपर प्लेट पांडुलिपियों की सराहना की। उन्होंने देशभर में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने ‘भारतं ज्ञान मिशन’ के तहत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वे और सूचीबद्ध करने के कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अभियान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

संरक्षण और डिजिटलीकरण जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलीकरण न केवल हमारी विरासत को सुरक्षित रखने में सहायक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इससे जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।

प्रदेश में 12.5 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वे

राजस्थान में अब तक साढ़े बारह लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वे कर उन्हें मिशन के पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। इस कार्य में अभय जैन ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा, जयप्रकाश शर्मा, राजस्थान पांडुलिपि मिशन के समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र कुमार शर्मा, सर्वेक्षण अधिकारी मोहित बिस्सा सहित लव कुमार देरासरी, गौरव आचार्य और लक्ष्मीकांत उपाध्याय का विशेष योगदान रहा है।

पांडुलिपियों का महत्व

अभय जैन ग्रंथालय में संरक्षित कॉपर प्लेट पांडुलिपियां (तांबे की पट्टिकाओं पर लिखे अभिलेख) प्राचीन धार्मिक, ऐतिहासिक और प्रशासनिक जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती हैं। यह ग्रंथालय राजस्थान के प्रमुख पांडुलिपि संग्रहों में से एक है। इन तांबे की पट्टिकाओं में राजकीय दानपत्र, धार्मिक परंपराएं और उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं। ये पांडुलिपियां राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती हैं।

इन प्लेटों और पांडुलिपियों में जैन धर्म के आगम, सिद्धांत, पुराण, चरित्र ग्रंथ और कथाएं दर्ज हैं। इनमें तीर्थंकरों के जीवन, जैन आचार्यों की शिक्षाओं और धार्मिक परंपराओं का वर्णन मिलता है।

देश के लिए बन रहा मॉडल

अभय जैन ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने बताया कि इस ग्रंथालय की स्थापना अगरचंद नाहटा ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से की थी। यह विशाल पांडुलिपि संग्रह वर्षों की साधना और समर्पण का परिणाम है, जिसे अब आधुनिक तकनीक के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बीकानेर का यह ग्रंथालय देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।