
rajasthan election : Voting team
भागीरथ ज्याणी
बज्जू. चार दशक पहले तक चुनाव में आटा-दाल, बिस्किट व राशन सामग्री साथ लेकर जाना पड़ता था। प्रत्याशी द्वारा चुनाव में चाबी छल्ले, घडिय़ां आदि का वितरण कर चुनाव का प्रचार किया जाता था। किसी भी मतदाता की पहचान में परेशानी होने पर पीछे बैठे एजेंट से बात की जाती थी। कुछ इसी तरह से बीते चुनावों के बारे में सेवानिवृत्त अध्यापक बताते हैं।
सेवानिर्वत्त शिक्षकों ने बताया कि पहले जो चुनाव होते थे, उनमें बैलेट पेपर छापे हुए आते थे। अब तो इवीएम और वर्तमान में नई तकनीक वीवीपेट मशीन भी आ चुकी है, उसमें डाले जाने वाले मत की पुष्टि भी कर सकते हैं। पहले ऐसी सुविधाएं नहीं हुआ करती थी। कई बार तो दो से तीन बार काउंटिंग करनी पड़ती थी। कई परिणाम तो दूसरे दिन घोषित हो पाते थे लेकिन अब उसी दिन दोपहर तक सारी तस्वीर साफ हो जाती है। पहले मतदान केन्द्र तक मतदाताओं को लाने में ट्रैक्टर आदि का प्रयोग किया जाता था। अब ऐसी स्थिति नही है। गांव-गांव में स्कूल होने से वहां ही मतदान केन्द्र बना दिए गए है। अब तो विकलांगों के लिए रैंप आदि बना दिए है। चुनाव प्रचार के लिए गांव-गांव में पैम्पलेट व छल्ले बंटते थे, पोस्टर चिपकाए जाते थे, इसे तय होता था कि उस व्यक्ति का माहौल ज्यादा है। लेकिन अब यह स्थान सोशल मीडिया ने ले लिया है। पहले में और अब की चुनाव प्रक्रिया में काफी बदलाव आ चुका है। पहले के मुकाबले चुनावी बुथों की सुरक्षा भी बढ़ी है।
लालटेन लेकर जाते थे
सेवानिवृत शिक्षक भींयाराम कड़वासरा ने बताया कि पहले बिजली की व्यवस्था नहीं होने से कई बूथों पर लालटेन साथ लेकर जाना पड़ता था। चुनावी व्यवस्था के लिए चुनावी दल दो या तीन दिन पहले जाता था, अब संसाधन होने से एक दिन पहले ही जाता था। पहले भोजन बनाने के लिए आटा-दाल, तेल केरोसिन आदि राशन सामग्री साथ लेकर जानी पड़ती थी, अब ऐसी स्थिति नही है। गांव में भोजन की व्यवस्था हो जाती है।
Published on:
01 Dec 2018 12:46 pm
