पत्रकारों से बातचीत में साध्वी ऋतंभरा ने हिंदू समाज को संगठित और सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, 'दुर्जनों की दुष्टता से ज्यादा खतरा सज्जनों की निष्क्रियता से होता है।' उन्होंने समाज से आत्मबल और साहस जागृत करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकारें अपना दायित्व निभाती हैं, लेकिन समाज को भी अपनी शक्ति पहचाननी होगी।