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एक माह से फ्रीजर में पड़े हैं हैपेटाइटिस के वायरल लोड सैंपल, किसने खड़े किए हाथ, यहां पढ़िए…

जांच के लिए सैंपल जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। वहां से रिपाेर्ट आने के बाद मरीज में हैपेटाइटिस की दवाइयों की मात्रा तय की जाती है, लेकिन अभी ये सैंपल यहां मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायलॉजी लैब के फ्रीजर में पड़े हुए हैं।

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इस समय मौसमी बीमारियों ने अपने पैर पसार रखे हैं। अस्पतालों में भी मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस आधार पर विभिन्न जांचों के लिए सैंपल भी लिए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि सैंपल की समय पर जांच नहीं हो पा रही है। हैपेटाइटिस बी जैसी बीमारी की जांच के लिए गए सैंपल करीब एक माह से मेडिकल कॉलेज में ही पड़े हैं। उनकी अभी तक जांच नहीं हो पाई है। इस वजह से यह मालूम नहीं चल रहा है कि मरीज के शरीर में वायरल लोड की क्या स्थिति है या बीमारी में कितना सुधार हो पाया है।

जानकारी के मुताबिक, संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में हैपेटाइटिस की जांच सुविधा लंबे समय से शुरू हो रखी है। मरीज के सैंपल लेने के बाद उसमें वायरल लोड की जांच की जाती है। इस जांच के लिए सैंपल जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। वहां से रिपाेर्ट आने के बाद मरीज में हैपेटाइटिस की दवाइयों की मात्रा तय की जाती है, लेकिन अभी ये सैंपल यहां मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायलॉजी लैब के फ्रीजर में पड़े हुए हैं। गत 18 अगस्त को अंतिम बार सैंपल भेजे गए थे। इसके बाद जयपुर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सैंपल लेने से मना कर दिया। फ्रीजर में इस समय 90 मरीजों के सैंपल पड़े हैं। पहले 20-20 सैंपल प्रति सप्ताह भेजे जाते थे।

स्वीकृति आने के बाद भेजेंगे सैंपल

माइक्रोबायलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंजली गुप्ता के मुताबिक 18 अगस्त को अंतिम बार सैंपल भेजे गए थे। जांच नहीं हो पाई है। अब जयपुर से स्वीकृति आने के बाद सैंपल भेजे जाएंगे। रिपाेर्ट भी जल्दी भेजने को कहा जाएगा। ताकि मरीजों का इलाज किया जा सके। इस जांच से वायरस का पता चलता है।