करीब 15 वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में बीरमा देवी के पति गिरधारी का निधन हो गया था। पति की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह बीरमा देवी के कंधों पर आ गई। आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अकेले दम पर परिवार को संभाला। बीरमा देवी के कोई पुत्र नहीं था। उनकी चार बेटियां हैं, जिनका उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पालन-पोषण किया। बेटियों की शिक्षा, परवरिश और विवाह की जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं निभाई। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने मां और पिता दोनों की भूमिका निभाकर बेटियों को बेहतर जीवन देने का प्रयास किया।