
छत्तीसगढ़ में दल बदल का असर (photo source- Patrika)
BJP Joining Controversy: हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। आम आदमी पार्टी के कई सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। इस बीच छत्तीसगढ़ में संदीप पाठक के भाजपा में जाने से विवाद और गहरा हो गया है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
बटहा (जिला मुंगेली) स्थित संदीप पाठक के गृह ग्राम में आप कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए उनके घर की दीवारों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखीं। सबसे ज्यादा चर्चा में रहा तंज— “जिसे समझा ‘थिंक टैंक’, वो निकला ‘सेप्टिक टैंक’” —जिसे लेकर सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है। इसके अलावा दीवारों पर ‘गद्दार’ जैसे शब्द लिखकर कार्यकर्ताओं ने अपना आक्रोश जाहिर किया। यह विरोध सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी छोड़ने के फैसले के खिलाफ व्यापक असंतोष को दर्शाता है।
आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। पोस्ट में संदीप पाठक के फैसले को लेकर तीखा व्यंग्य करते हुए लिखा गया कि जिसे पार्टी का “थिंक टैंक” माना जाता था, वही अब “सैप्टिक टैंक” साबित हुआ। इस पोस्ट के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच ऑनलाइन बहस और भी तेज हो गई है, जिससे यह मुद्दा केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
संदीप पाठक को लंबे समय तक पार्टी का रणनीतिक चेहरा और चुनावी ‘थिंक टैंक’ माना जाता रहा है। उनकी रणनीतियों ने कई चुनावों में पार्टी को मजबूती दी थी। ऐसे में उनका अचानक पार्टी छोड़कर भाजपा में जाना कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल पार्टी की आंतरिक संरचना को प्रभावित करता है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर डाल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में और विरोध-प्रदर्शन होने की संभावना जताई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक टकराव का यह दौर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा।
संदीप पाठक का दल बदल केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि एक बड़े सियासी बदलाव का संकेत बन गया है। एक ओर जहां भाजपा इसे अपनी मजबूती के रूप में देख सकती है, वहीं आम आदमी पार्टी के लिए यह संगठनात्मक चुनौती बनकर उभरा है। स्पष्ट है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गहराएगा—सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक—और छत्तीसगढ़ की राजनीति में इसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।
Published on:
28 Apr 2026 09:21 am
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