
CG News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में धूम्रपान न केवल इसे करने वालों के लिए, बल्कि उनके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। आयुर्विज्ञान संस्थान (सिस) में सामने आए ताजा आंकड़ों के अनुसार, 40 प्रतिशत कैंसर मरीज ऐसे हैं, जिनकी बीमारी की मुख्य वजह धूम्रपान है। कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक, धूम्रपान करने वालों में फेफड़े (लंग्स), गला, मुंह, बड़ी आंत और आहार नली तक के कैंसर की आशंका सबसे अधिक होती है।
सिस के कैंसर विभाग में इलाजरत मरीजों में सबसे ज्यादा मामले लंग्स और गले के कैंसर के पाए जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक धूम्रपान करने से शरीर में कैंसरकारी कोशिकाएं तेजी से पनपती हैं, जो बाद में लाइलाज स्थिति में पहुंच जाती हैं। इससे वे लोग भी प्रभावित हैं जो धूम्रपान करने वाले के संपर्क में होते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, धूम्रपान करने वालों के संपर्क में आने वाले लोग, जिन्हें पैसिव स्मोकर्स कहा जाता है, वे भी उतने ही खतरे में होते हैं। इनके शरीर में इससे लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता यानी इयुनिटी विकसित नहीं हो पाती, जिससे वे जल्दी प्रभावित होते हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में यह खतरा अधिक देखा जा रहा है। लिहाजा पैसिव स्मोकिंग के कारण भी कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
प्राचीनकाल में धूम्रपान करने वाले ज्यादातर लोग हुक्का गुड़गुड़ाया करते थे। बाद में उसकी जगह बीड़ी, सिगरेट ने ले लिया। वर्तमान में एक बार फिर इसका चलन बढ़ने लगा है। शहरों में चोरी छिपे हुक्का बार खोले गए हैं। बड़े होटलों में पार्टियों में भी इसका चलन बढ़ा है। युवतियां भी बढ़चढ़ कर इस्तेमाल करने लगी हैं। लिहाजा युवतियों को भी कैंसर का खतरा बढ़ गया है।
सिस के कैंसर विभाग में वर्तमान में 150 मरीजों का रेगुलर इलाज चल रहा है, जिनमें से 60 मरीज ऐसे हैं, जिनकी बीमारी की सीधी वजह धूम्रपान है। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार धूम्रपान करने से कैंसर का खतरा 70 फीसदी तक बढ़ जाता है। यदि व्यक्ति पहले से किसी बीमारी से ग्रसित हो तो यह खतरा और भी घातक हो सकता है। हालांकि बिना धूम्रपान वालों को भी कैंसर हो सकता है।
धूम्रपान की वजह से कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। फिर चाहे वह एक्टिव स्मोकर्स यानी सीधे धूम्रपान करने वाले हों या पैसिव यानी उनके संपर्क में आने वाले। कुल कैंसर मरीजों में जिले में 40 प्रतिशत मरीज स्मोकर्स ही हैं। लगातार यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
लिहाजा हमें समय रहते सावधान हो जाना होगा। न सिर्फ स्मोकिंग का त्याग करना होगा, बल्कि ऐसे लोगों को जागरूक करते हुए जो स्मोक कर रहा है, उससे दूर रहना होगा। जिससे कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से बचा जा सके। हुक् का बार पर भी अंकुश लगाए जाने चाहिए।
Published on:
13 Mar 2025 12:38 pm
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