
रेत के बाद मुरूम की लूट (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Bilaspur News: बिलासपुर जिले में अवैध खनन का दायरा अब रेत से आगे बढक़र मुरूम तक पहुंच गया है। खनन माफिया खुलेआम बड़े पैमाने पर मुरूम की खुदाई कर रहे हैं, जिससे कई इलाकों की जमीन गहरी खाइयों में तब्दील हो चुकी है। लोखंडी और गनियारी क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक हैं, जहां 20 से 25 फीट गहराई तक खुदाई कर दी गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, माफिया दिन-रात जेसीबी और भारी मशीनों से मुरूम निकाल रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई केवल सडक़ों पर वाहनों की जांच तक सीमित है, जबकि असली खनन अंदरूनी क्षेत्रों में बेखौफ जारी है। इससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अवैध खनन का असर अब पर्यावरण और कृषि पर साफ दिखने लगा है। जहां पहले खेती होती थी, वहां अब गहरी खाइयां बन गई हैं। जलस्तर गिर रहा है और कई जगह जलभराव की समस्या बढ़ रही है। इससे किसानों की फसलें खराब हो रही हैं और उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बेलतरा और तखतपुर क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली नेताओं का संरक्षण खनन माफियाओं को मिला हुआ है। इसी वजह से उन पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो पा रही। प्रशासन की निष्क्रियता और चयनात्मक कार्रवाई से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की शिकायत कई बार कलेक्टर और खनिज विभाग तक की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लगातार अनदेखी से खनन माफिया के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। रात के समय मशीनों की आवाज से गांवों का माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
बिलासपुर में अवैध खनन अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा, यह शासन की इच्छाशक्ति की परीक्षा बन चुका है। और अफसोस, प्रशासन इस परीक्षा में नाकाम नजर आ रहा है। रेत के बाद मुरूम तक फैल चुका यह अवैध कारोबार खुलेआम 20-25 फीट गहरी खुदाई कर रहा है, लेकिन कार्रवाई केवल सडक़ों पर वाहनों की खानापूर्ति तक सीमित है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब ग्रामीण बार-बार शिकायत कर रहे हैं, तब जिम्मेदार विभाग आखिर मौन क्यों हैं? क्या यह महज लापरवाही है या फिर संरक्षण की वह परत, जो सच्चाई को ढंक रही है? बेलतरा और तखतपुर क्षेत्र के नेताओं पर लगे आरोप इस पूरे मामले को और संदिग्ध बनाते हैं।
इस अवैध खनन ने केवल जमीन ही नहीं खोदी, बल्कि किसानों की उम्मीदें, पर्यावरण का संतुलन और प्रशासन की साख भी गहरी खाई में धकेल दी है। यदि अब भी ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो यह स्पष्ट संदेश होगा कि कानून का राज नहीं, बल्कि माफियाओं का शासन चल रहा है और यह किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
ओपी चंद्रवंशी, नायब तहसीलदार, गनियारी, दिन में तो खनन नहीं हो रहा है, रात में खनन हो रहा होगा तो खनिज विभाग और पुलिस की टीम की सहायता लेकर इस पर कार्रवाई की जाएगी। पटवारी-आरआई को साथ लेकर जहां खनन हो रहा, वहां जांच की जाएगी।
Published on:
15 Apr 2026 02:54 pm
