
पेट्रोल पंप (सोर्स: IANS)
Petrol Diesel Crisis: बिलासपुर जिलों में इन दिनों पेट्रोल-डीजल संकट गहराता नजर आ रहा है। शहर के कई पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लग गए हैं, जबकि कई पंप पूरी तरह ड्राई हो चुके हैं। अब लोगों को पेट्रोल पंपों के चक्कर काटने पड़ रहे। सूत्रों के मुताबिक, बिलासपुर शहर और आसपास के करीब 8 पेट्रोल पंप पूरी तरह ड्राई हो चुके हैं। इनमें से कुछ पंप संचालकों ने तेल कंपनियों को भुगतान कर दिया है, जिसके बाद डिपो से टैंकर रवाना किए गए हैं।
उम्मीद जताई जा रही है कि ऐसे पंपों पर जल्द आपूर्ति बहाल हो जाएगी। वहीं करीब 4 पंपों की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
जानकारों की मानें तो यह संकट सिर्फ स्थानीय स्तर का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ है। मध्य-पूर्व देशों में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर देशभर की तेल आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। दूसरी ओर तेल कंपनियों ने डीलर्स के लिए क्रेडिट सिस्टम लगभग बंद कर दिया है। अब अधिकांश पंप संचालकों को एडवांस भुगतान करना पड़ रहा है। कई डिपो में लोडिंग में देरी हो रही है, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि कमर्शियल पंपों में डीजल की कीमतें बढ़ने के बाद भारी वाहन संचालक सामान्य पेट्रोल पंपों से कम दाम में डीजल भरवा रहे हैं। इससे सामान्य पंपों पर दबाव कई गुना बढ़ गया है। वहीं, कुछ पंप संचालक भी रेट बढ़ाकर कमर्शियल वाहनों को तेल दे रहे, जिससे समस्याएं बढ़ी हैं। जिसे रोकने के लिए कोटा सिस्टम किया जा रहा है।
शहर में ईंधन खत्म होने की खबर फैलते ही लोगों में घबराहट बढ़ गई। कई वाहन चालक जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाने लगे। सामान्य दिनों में जहां लोग 200-500 रुपए का ईंधन लेते थे, वहीं अब टंकियां फुल कराई जा रही हैं। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि अचानक मांग बढऩे से स्टॉक तेजी से खत्म हुआ।
डीजल संकट का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। खेती-किसानी के कार्यों के लिए डीजल पर निर्भर किसान परेशान हैं। ट्रैक्टर, पंप और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में दिक्कतें आने लगी हैं। वहीं छोटे ट्रांसपोर्टर, स्कूल वाहन संचालक, ऑटो चालक और निजी वाहन मालिक भी परेशान हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ तेल कंपनियों ने हालात को देखते हुए सप्लाई नियंत्रण के लिए नई व्यवस्था लागू की है। कई पंपों पर एक बार में सीमित मात्रा में ही ईंधन देने के निर्देश दिए गए हैं। कहीं 40 लीटर तो कहीं 50 लीटर तक की सीमा तय की गई है। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य कालाबाजारी रोकना और अधिक से अधिक लोगों तक ईंधन पहुंचाना है। हालांकि, इस व्यवस्था से बड़े वाहन संचालकों और ट्रांसपोर्टरों की परेशानी बढ़ गई है।
संजय अग्रवाल, कलेक्टर, बिलासपुर के मुताबिक, जिले के लगभग 8 पेट्रोल पंप वर्तमान में ड्राई हुए हैं, लेकिन तेल कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से वहां सप्लाई बहाल करने की प्रक्रिया जारी है। प्रधानमंत्री द्वारा भी लोगों से अपील की गई है कि अनावश्यक स्टॉकिंग और पैनिक बाइंग से बचें।
Published on:
14 May 2026 03:41 pm
बड़ी खबरें
View Allबिलासपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
