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HIV Patients Death: बड़ी लापरवाही केयर सपोर्ट सेंटर पर ताला, दो माह में 65 एचआईवी मरीजों ने तोड़ा दम

Health Department Negligence: संक्रमित मरीजों की मौत हो गई। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं

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HIV Patients Death

केयर सपोर्ट सेंटर पर ताला (Photo Patrika)

HIV Patients Death: @शरद त्रिपाठी। प्रदेश में एचआईवी संक्रमित मरीज अब बीमारी से कम और सिस्टम की बेरुखी व लापरवाही से ज्यादा दम तोड़ रहे हैं। राज्य शासन द्वारा मार्च 2026 के बाद विलासपुर, रायपुर और जगदलपुर में संचालित केयर सपोर्ट सेंटर बंद किए जाने के बाद सूबे के लगभग 40 हजार संक्रमिती की जिदगी बने अंधेरे और असुरक्षा के साये में पहुंच गई है। हालात इस कदर खौफनाक हो चुके हैं कि बीते महज दो महीनों में प्रदेशभर में 65 से अधिक एचआईभी संक्रमितों की मौत हो चुकी है, जिनमें अकेले बिलासपुर संभाग की 22 मोते शामिल है।

HIV Patients Death: मरीजों की हालत लगातार जानलेवा

इस संवेदनशील मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि इन लाइफ सेविंग सेंटरों पर ताला लगाने के बाद शासन स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक तैयार नहीं की गई। इलाज, दवाओं और नियमित मॉनिटरिंग का पूरा ढांचा ध्यास्त होने से मरीजों की हालत लगातार जानलेवा हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी गहरी खामोशी से बैठे हुए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से हर एक संक्रमित मरीज की पूरी जानकारी और मेडिकल हिस्ट्री की लगातार ट्रैकिंग की जाती थी। किस मरीज की कौन सी जांच कब होनी है, कौन सा मरीज दूरी या किसी अन्य कारण से इलाज छोड़ रहा है, इसकी मॉनिटरिंग रोजाना होती थी।

13 साल पुराना सुरक्षा कवच अचानक छीना

13 वर्ष पहले राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा एक परियोजना के तहत बिलासपुर, रायपुर और जगदलपुर में एक-एक केयर सपोर्ट सेंटर की शुरुआत की गई थी। इन सेंटरों का उद्देश्य केवल अस्पताल से दवाएं बांटना नहीं, बल्कि संक्रमित मरीजों की पूरी वेखभाल, सामाजिक सुरक्षा और मानसिक संबल सुनिश्चित करना था। ये सेंटर मरीजों को समय पर दवाएं उपलब्ध कराने नियमित जांच के लिए अस्पताल पहुंचाने और उन्हें शासन की अन्य जनकल्याणकारी व पेंशन योजनाओं का लाभ दिलाने में एक मजबूत सेतु का काम करते थे।

मॉनिटरिंग रुकना ही मरीजों के लिए बड़ा काल

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एचआईवी संक्रमित मरीजों के लिए नियमित दवा और लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग जीवन रेखा की तरह होती है। यदि मरीज नियमित रूप से एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी नहीं ले पाते, तो वायरल तेजी से हावी होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता शून्य हो जाती है। ऐसे में मरीज अन्य गंभीर बीमारियों की चपेट में आकर दम तोड़ देता है। वर्तमान प्रशासनिक विफलता कई बेकसूर मरीजों को सीधे मौत के मुहाने तक धकेल रही है। वही जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए है।

कुछ प्रशासनिक अनियमिताओं की वजह से राज्य के तीनों केयर सपोर्ट सेंटर बंद किए गए हैं। मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जल्द ही तैयार की जाएगी। संक्रमितों की स्वास्थ्य सुच्चा और उनकी दवाओं का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।

-डॉ. खेमराज सोनवानी, अति. परि. संचालक एड्स कंट्रोल सोसायटी

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