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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति, भ्रूण का DNA सुरक्षित रखने के आदेश

Chhattisgarh High Court Abortion Judgment: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई 21 वर्षीय युवती को गर्भपात की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि रेप पीड़िता को अपनी गर्भावस्था पर निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।

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High Court MTP Verdict

High Court MTP Verdict (photo source- Patrika)

High Court MTP Verdict: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई 21 वर्षीय युवती को गर्भपात (MTP) की अनुमति दे दी है। जस्टिस एनके व्यास की एकल पीठ ने कहा कि रेप पीड़िता को यह पूरा अधिकार है कि वह अपनी गर्भावस्था को जारी रखना चाहती है या नहीं। कोर्ट ने पीड़िता की स्थिति को देखते हुए उसे सिम्स या जिला अस्पताल बिलासपुर में भर्ती कराने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही भ्रूण का DNA सैंपल सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है।

High Court MTP Verdict: मामला क्या है?

यह मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां एक 21 वर्षीय युवती ने अपने प्रेमी पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोप है कि आरोपी ने युवती के साथ जबरदस्ती संबंध बनाए और शादी का वादा भी किया, लेकिन बाद में शादी करने से इनकार कर दिया। दुष्कर्म की घटना के बाद युवती गर्भवती हो गई, जिससे उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ा।

कोर्ट में दायर की गई याचिका

गर्भावस्था के कारण मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव झेल रही पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया कि वह इस गर्भ को जारी नहीं रखना चाहती, क्योंकि यह उसके लिए मानसिक कष्ट और सामाजिक शर्मिंदगी का कारण बन रहा है।

मेडिकल जांच और रिपोर्ट

कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), बिलासपुर को मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच करने के निर्देश दिए थे। मेडिकल रिपोर्ट में पाया गया कि युवती लगभग 16 से 20 सप्ताह की गर्भवती है।

High Court MTP Verdict: हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी रेप पीड़िता को अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है। कोर्ट ने माना कि इस स्थिति में बिना न्यायिक अनुमति के डॉक्टर गर्भपात नहीं कर सकते थे, इसलिए याचिका स्वीकार की जाती है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता को तत्काल सिम्स या जिला अस्पताल, बिलासपुर में भर्ती कराया जाए, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी सहमति से मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) प्रक्रिया पूरी करेगी।

भ्रूण DNA सुरक्षित रखने के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि भ्रूण का DNA सैंपल सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे चलकर आपराधिक मामले की जांच और ट्रायल में इसका उपयोग किया जा सके। यह फैसला न केवल पीड़िता के अधिकारों को मजबूत करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि न्यायपालिका ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की मानसिक, शारीरिक और सामाजिक स्थिति को प्राथमिकता देती है।

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