
बिलासपुर में फटा बादल (photo source- Patrika)
Bilaspur Cloudburst: बिलासपुर में हुई मूसलाधार बारिश ने इस बार मौसम वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक को हैरान कर दिया है। शहरी क्षेत्र में पिछले 24 घंटे के भीतर 491 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जो प्रदेश के इतिहास में किसी बड़े रेकॉर्ड से कम नहीं है। वहीं, पिछले 36 घंटों में कुल 633.6 मिमी पानी बरस चुका है।
इस पूरी मौसमी घटना में सबसे गौर करने वाली बात यह रही कि गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात को केवल दो घंटे के भीतर 276.2 मिमी बारिश हो गई। मौसम विज्ञान की भाषा में इसे 'बादल फटना' (क्लाउड बर्स्ट) ही कहा जाएगा, क्योंकि जब एक घंटे में 100 मिमी से अधिक बारिश होती है, तो वह इसी श्रेणी में आती है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, मैदानी या घने शहरी इलाकों में बादल फटने की घटना बेहद असामान्य है। सामान्यतः ऐसी घटनाएं पहाड़ी और ऊंचे क्षेत्रों में होती हैं, जहां नमी से भरे बादल पहाड़ों से टकराकर एक जगह रुक जाते हैं और कम समय में अत्यधिक पानी छोड़ देते हैं। पूरे देश में मानसूनी सीजन के दौरान उत्तर-पूर्वी राज्यों में 10 से 12 बार बादल फटने की घटनाएं होती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के किसी मैदानी व शहरी इलाके में ऐसी स्थिति पहली बार निर्मित हुई है।
बिलासपुर बंगाल की खाड़ी से करीब 300 से 400 किलोमीटर दूर है, जहां से इस समय प्रचुर मात्रा में नम हवाएं आ रही हैं। इस अतिभारी बारिश के पीछे मुख्य वजह एक साथ तीन मौसम प्रणालियों (सिस्टम) का सक्रिय होना है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया), मानसूनी द्रोणिका (ट्रफ लाइन), ऊपरी हवा का चक्रवात (साइकलोनिक सर्कुलेशन) है।
इन तीनों सिस्टम के एक साथ मिलने के कारण बिलासपुर को घने काले बादलों ने घेर लिया। ये बादल आगे बढ़ने के बजाय एक ही जगह पर स्थिर (स्टेशनरी) हो गए और भारी नमी के कारण वहीं जमकर बरस पड़े। इस प्रचंड जल प्रहार ने बिलासपुर में 100 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इससे पहले साल 1926 में 24 घंटे के भीतर सर्वाधिक 291 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आधिकारिक मानकों के अनुसार, जब लगभग 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के दायरे में 1 घंटे के भीतर 100 मिमी (10 सेंटीमीटर) या उससे अधिक बारिश दर्ज की जाती है, तो उसे तकनीकी रूप से बादल फटना कहा जाता है।
बिलासपुर में बादल फटने जैसी यह मौसमी घटना निश्चित रूप से चौंकाने वाली है। जब मौसम में कम दबाव के क्षेत्र के साथ-साथ द्रोणिका और ऊपरी हवा का चक्रवात जैसे तीन शक्तिशाली सिस्टम एक साथ सक्रिय हो जाएं, तो ऐसी अतिभारी बारिश की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। घने काले बादलों को जब इन तीनों सिस्टम से लगातार भारी नमी मिलती रही, तो वे आगे बढ़ने के बजाय एक ही जगह पर ठहरकर पूरी तरह बरस गए-बी.के. चिंधालोरे, मौसम विज्ञानी, मौसम केंद्र रायपुर
Updated on:
19 Jul 2026, 6:45 AM IST
Published on:
19 Jul 2026, 6:45 AM IST
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