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आजाद भारत का स्वप्न साकार करने डॉ शिव दुलारे मिश्र पहुंचे गांव गांव, रामायण की चौपाई गाकर किया लोगो को आंदोलन में शामिल

- डॉ. शिवदुलारे मिश्रा ने रामायण मंडली के माध्यम से जलाई आजादी की अलख - लोगो का उपचार के साथ साथ आजादी आंदोलन में निभाई सक्रिय भूमिका

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Dr. Shiv Dulare Mishra reached village to village to fulfill the dream

आजाद भारत का स्वप्न साकार करने डॉ शिव दुलारे मिश्र पहुंचे गांव गांव, रामायण की चौपाई गाकर किया लोगो को आंदोलन में शामिल

बिलासपुर. उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 1880 में जन्मे पं शिव दुलारे मिश्र माता के साथ 5 वर्ष की उम्र में बिलासपुर आ गए। म्युनियपल हाई स्कूल में पढ़ाई करने के बाद कोलकत्ता मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के चले गए। कोलकत्ता में डॉक्टरेट की पढाई के दौरान पं शिव दुलारे मिश्र क्रांतिकारियों के सम्पर्क में आए।

पढ़ाई के दौरान क्रांतिकारी विचारधारा से प्रेरित डॉ. शिवदुलारे मिश्र डाक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिलासपुर लौटे, वर्ष 1906 से आजादी की लड़ाई में सक्रिय हुए और देश की आजादी के बाद बिलासपुर के पहले विधायक बने।

बिलासपुर के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शिवा मिश्रा बताया कि डॉ. शिव दुलारे मिश्र का जीवन पूरी तरह देश सेवा को समर्पित था। बिलासपुर में दवा खाना चला कर लोगो को उपचार करना, उन्हें देश सेवा के लिए प्रोत्साहित करना,

गांव गांव जाकर रामायण मंडली व प्रभात फेरी के माध्यम से लोगो के मन में देश प्रेम की भावना जागृत करते थे। लोगो को बताते थे कि किस तरह अंग्रेज (मरिक्ष) लोगो पर अत्याचार करते है। असहयोग आंदोलन व कई आंदोलनो में बिलासपुर की जनता का प्रतिनिधित्व किया।

डॉ. शिव दुलारे मिश्र में देश सेवा का ऐसा जज्बा था वर्ष 1935-36 के दौरान बीएनआर (बंगल नागपुर रेल) में अंग्रेज अफसरो की मनमानी के खिलाफ रेल श्रमिको ने काम बंद कर आंदोलन शुरू कर दिया। एक समय ऐसा आया कि आंदोलनरत श्रमिक भूख से विचलित होकर आंदोलन समाप्त करने की योजना बना रहे थे।

उस दौरान डॉ. शिवदुलारे मिश्र ने रेल कर्मियों को खाने की व्यवस्था करवाई उनका उपचार किया। आंदोलनरत रेल कर्मियों के परिवार को भी आश्रय दिया। लम्बे चले आंदोलन में अंग्रेजो को आखिर में आंदोलनरत श्रमिको की मांग पूरी करनी पड़ी।

महात्मागांधी का चेकअप डॉक्टर साहब की जिम्मेदारी
महात्मागांधी पहली बार 1932 में बिलासपुर पहुंचे थे। बिलासपुर में रहने के दौरान डॉ. शिवदुलारे मिश्र रोजना महात्मा गांधी का चेकअप किया करते थे। पोते शिवा मिश्रा आज भी दादा डॉ. शिव दुलारे मिश्र के इस्थिगनों माइनो मीटर धरोहर के रुप में सहेज कर रखा है।

आजादी की घोषणा के बाद जय स्तम्भ को किया पवित्र
14 अगस्त 1947 में देश आजादी की घोषणा होने के बाद डॉ. शिव दुलारे मिश्र ने आसपास के पंडितो को बुलाया। पंडितो की सलाह पर उन्होंने कहां अंग्रेजो (मरिक्षो) के पाव रखने से मेरा भारत मैला हो गया है।

इसे पवित्र करना पडेगा शनिचरी पडाव जहां महात्मागांधी ने भाषण दिया था। उसके नजदीक 14 अगस्त की पूरी रात हवन व पूजन करवाया। सुबह जब तिरंगा फैराया गया तो जय स्तम्भ में ध्वजा रोहण किया किया था।

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सेंट्रल लायब्रेरी का नाम डॉ साहब के नाम पर
सरकंडा क्षेत्र में नवनिर्मित सेंट्रल लायब्रेरी का दो साल पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नाम करण करते हुए डॉ. शिव दुलारे मिश्र लायब्रेरी रखा है। सेंट्रल लायब्रेरी का नाम करण डॉ. शिव दुलारे मिश्र के नाम पर होने से आने वाली पीढ़ी को बिलासपुर में आजादी की अलख जगाने व स्वतंत्रा संग्राम में प्रमुख भूमिका निभाने के हमेशा याद रखा जाएगा।

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