
बिलासपुर . छत्तीसगढ़ प्रदेश शासकीय तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष पी.आर. यादव ने रविवार को पत्रिका टॉपिक ऑफ द डे में प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की मांगों को और उनके आंदोलनों को विस्तार से चर्चा की। इसमें उन्होंने माना कि पिछले एक दशक में कर्मचारी संगठनों द्वारा अपने मांगों को लेकर आंदोलन एक दशक पहले की अपेक्षाकृत शिथिलता आई है, लेकिन कोई भी सरकारें कर्मचारी संघ के आंदोलन को कमजोर न समझें। अपनी जायज मांगों को लेकर कर्मचारी संघ सन् 2018 को राज्य में संघर्ष वर्ष के रुप में मना रही है। यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ का संघर्षपूर्ण लंबा इतिहास रहा है। कर्मचारियों की हितों में मध्यप्रदेश और अब छत्तीसगढ़ में लगातार संघर्ष करती आ रही है। यादव ने कहा कि राज्य के कर्मचारियों की एकजुटता के चलते करीब पांच लाख कर्मचारियों सातवां वेतन आयोग की सिफारिशों को राज्य सरकार को स्वीकार करना पड़ा। हालांकि राज्य सरकार पूरी तरीके से इस वेतनमान को क्रियान्वित नहीं कर सकी है। संघ इसे लागू कराने के लिए कृति संकल्पित है।
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प्रांताध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में अपने संकल्प पत्र में कर्मचारी हितों के लिए अनेक घोषणाएं की थी, लेकिन इन घोषणाओं पर अब तक अमल नहीं हो पाया है। कर्मचारी संघ ने इस वर्ष राज्य सरकार को उनके वायदे याद दिलाने के लिए पूरे वर्ष लगातार आंदोलनों की पहल कर रही है। यादव ने कहा कि कर्मचारी संघ के स्वर्ण जयंती वर्ष में उनके हितों को पूरा कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इसके लिए ब्लॉक, तहसील, जिला मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन, सत्याग्रह समेत हर आंदोलन किया जाएगा। यादव ने दावा किया कि राज्य के तृतीय वर्ग कर्मचारियों का एक मात्र संगठन है जिसकी ब्लॉक, तहसील और सभी 27 जिलों में इकाईयां कार्यरत है। ऐसा प्रदेश के किसी अन्य कर्मचारी संगठनों की इकाईयां नहीं है।
Published on:
21 Jan 2018 02:37 pm
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