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शिक्षाकर्मियों के पुनरीक्षित वेतनमान को लेकर हाईकोर्ट ने सुनाया ये बड़ा फैसला

शिक्षाकर्मियों के पुनरीक्षित वेतनमान के लिए हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा- पुनरीक्षित वेतनमान के लिए एनओसी अनिवार्य नहीं है।

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Shikshakarmi

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बिलासपुर . शिक्षाकर्मियों के पुनरीक्षित वेतनमान के लिए एनओसी अनिवार्य नहीं है। हाईकोर्ट ने निम्न एवं उच्च सभी पदों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र के प्रावधान को नियम विपरीत बताते हुए पुनरीक्षित वेतनमान की गणना के निर्देश दिए हैं।

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याचिकाकर्ता अजय पाठक, रीता प्रधान, अन्नू गंगवेर, रश्मि साहू, वीर सिंह ठाकुर एवं अन्य दुर्ग जिले के विभिन्न स्कूलों में शिक्षाकर्मी वर्ग 1 एवं 2 के पद पर कार्यरत हैं। वे पूर्व में वर्ग 2 एवं 3 में कार्यरत थे, नवीन भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर वर्ग 1 एवं 2 में पदोन्नत हुए हैं।

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राज्य शासन ने 17 मई 2013 को एक परिपत्र जारी कर 8 वर्ष पूर्ण करने पर शिक्षाकर्मियों को शिक्षकों के समतुल्य वेतन देने के निर्देश दिए। इसके बाद 23 अप्रैल 2016 को एक अन्य परिपत्र जारी कर शिक्षाकर्मियों की नवीन नियुक्ति के पूर्व की गई सेवा 8 वर्ष के लिए गणना करने के निर्देश दिए।

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लेकिन उक्त गणना केवल उन्हीं शिक्षाकर्मियों के लिए मान्य होगी, जिन्होंने पूर्व पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर नवीन परीक्षा में भाग लिया। अनापत्ति प्रमाण पत्र की शर्त को दुर्ग एवं बालोद जिले के याचिकार्ताओं ने अधिवक्ता अजय श्रीवास्तव के माध्यम से चुनौती दी।

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बताया गया कि सेवा भर्ती नियम 2012 में कहीं भी अनापत्ति प्रमाण पत्र के प्रावधान का कोई उल्लेख नहीं है, इस कारण ये प्रावधान नियम विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद प्रावधान को नियम विपरीत बताते हुए पुनरीक्षित वेतनमान की गणना बिना एनओसी के करने के निर्देश दिए हैं।