
बारिश में हादसे के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला (photo source- Patrika)
School Closed: बिलासपुर जिले के तखतपुर क्षेत्र में घोंघा नदी के एनीकट को पार करते समय तीन स्कूली बच्चों की तेज बहाव में बहने से मौत के बाद शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। दर्दनाक हादसे के बाद जिला शिक्षा विभाग ने बारिश के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। जिला शिक्षा अधिकारी ने उफनती नदी-नालों, रपटों और जलभराव वाले रास्तों से जुड़े स्कूलों में तत्काल अवकाश घोषित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा स्कूल लगने के बाद अचानक तेज बारिश शुरू होने की स्थिति में भी बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बारिश और जलभराव के बीच बच्चों को जोखिम वाले रास्तों से अकेले घर भेजने की अनुमति नहीं होगी।
तखतपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत समडील के रहने वाले तीन बच्चे अनमोल, स्तुति और शिक्षा जायसवाल शनिवार को नवापारा स्थित स्कूल से छुट्टी के बाद पैदल अपने घर लौट रहे थे। घर जाने के रास्ते में उन्हें नदी का एनीकट पार करना था। इसी दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और तेज बहाव की चपेट में आने से तीनों बच्चे बह गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची।
कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद तीनों बच्चों के शव बरामद किए गए। इस घटना ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया। हादसे के बाद शिक्षा विभाग ने मानसून के दौरान स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए सभी संस्था प्रमुखों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षा विभाग के आपातकालीन निर्देशों के अनुसार, जिन स्कूलों तक पहुंचने वाले रास्तों में भारी जलभराव है या जहां नदी-नाले उफान पर हैं, वहां तत्काल अवकाश घोषित किया जा सकेगा। वहीं, अगर बच्चे स्कूल पहुंच चुके हैं और इसके बाद अचानक तेज बारिश या जलभराव की स्थिति बनती है, तो शिक्षकों को बच्चों की विशेष निगरानी करनी होगी। किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों को अकेले या खतरनाक रास्तों से पैदल घर नहीं भेजा जाएगा।
बच्चों को तब तक स्कूल परिसर में सुरक्षित रखा जाएगा, जब तक उनके अभिभावक स्वयं स्कूल पहुंचकर उन्हें अपने साथ घर नहीं ले जाते। विभाग का उद्देश्य बारिश के दौरान बच्चों को नदी, नाले, रपट और जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से रोकना है।
जारी दिशा-निर्देशों में सभी शाला प्रमुखों को अपने क्षेत्र में आने वाले नदी-नालों, रपटों और जलमग्न रास्तों की स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। ऐसे स्थानों से विद्यार्थियों की आवाजाही पूरी तरह रोकने के निर्देश दिए गए हैं। भारी बारिश या मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राचार्य और प्रधान पाठक अपने स्तर पर भी तत्काल निर्णय ले सकेंगे। विभाग ने उन्हें आवश्यकता पड़ने पर स्कूल में अवकाश घोषित करने का अधिकार दिया है, ताकि किसी अप्रिय घटना का इंतजार न करना पड़े।
ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे बारिश के मौसम में बच्चों को अकेले नदी, नाले, तालाब या अन्य जलस्रोतों की ओर न जाने दें। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखने और जोखिम वाले रास्तों से दूर रखने की सलाह दी गई है।
बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक ने कहा कि तेज बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्राचार्यों और संस्था प्रमुखों को पहले ही सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी स्कूल प्रमुखों से सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने को कहा है। बारिश के दौरान स्कूल परिसर और बच्चों की आवाजाही पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
तखतपुर की घटना के बाद शिक्षा विभाग का फोकस अब उन स्कूलों पर है, जहां विद्यार्थियों को बारिश के दौरान नदी-नालों, रपटों या जलभराव वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मौसम खराब होने की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि बारिश के दौरान कोई बच्चा जोखिम भरे रास्ते से अकेले घर न जाए। विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रमुखों को परिस्थितियों के अनुसार तत्काल निर्णय लेने और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
Updated on:
27 Aug 2026 04:51 pm
Published on:
27 Aug 2026 04:51 pm
